--Advertisement--

धनतेरस / राम के अयोध्या लौटने पर कैसा रहा होगा दृश्य? भास्कर ने रामचरित मानस के अनुसार किया रूपांतरण



diwali 2018 dhanteras real story from Puran DB Special
diwali 2018 dhanteras real story from Puran DB Special
X
diwali 2018 dhanteras real story from Puran DB Special
diwali 2018 dhanteras real story from Puran DB Special

  • पांच दिनी दीप महापर्व आज धनतेरस के साथ शुरू 
  • पढ़ें समुद्र मंथन की कथा ब्रह्मवैवर्त पुराण से

Dainik Bhaskar

Nov 05, 2018, 02:53 PM IST

उत्साह और उमंग के पर्व दीपोत्सव की शुरुआत सोमवार को धनतेरस पर घरों-प्रतिष्ठानों में कुबेर पूजन से होगी। इसके बाद मंगलवार को रूप चतुर्दशी, बुधवार को दीपावली यानी लक्ष्मी पूजन, गुरुवार प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और शुक्रवार को भाईदूज मनाई जाएगी। 

 

धनतेरस : समुद्र मंथन की पौराणिक कथा 

पर्वों पर हमेशा कुछ अलग करने की दैनिक भास्कर की परंपरा सतत् जारी है। इस बार मौका है धनतेरस का, भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने का और समुद्र मंथन का। समुद्र मंथन दरअसल देश, समाज, परिवार और घर-घर का मंथन है। आतंकवाद, अतिवाद, जातिवाद, वैमनस्य और कटुता के असुरों को हम सब मिलकर परास्त करने का प्रयास शुरू कर दें तो घर-घर में समुद्र-सी समृद्धि आने से कोई रोक नहीं सकता। यह आध्यात्मिक समृद्धि फिर किसी शिव को अकेले हलाहल पीने नहीं देगी।

 

समुद्र मंथन क्यों ?

संदर्भ कथा : ऋषि दुर्वासा के शाप से जब देवराज इंद्र शक्तिहीन हो गए, तीनों लोकों का साम्राज्य राजा बलि के अधीन हो गया। राक्षसों ने देवताओं पर हमले शुरू कर दिए और देवगण निरीह स्थिति में ब्रह्माजी को लेकर भगवान विष्णु के पास पहुंचे। तब विष्णु ने क्षीर सागर के मंथन का उपाय बताया और कहा कि रत्नों का लोभ देकर आप राक्षसों को साथ लीजिए, इससे समुद्र मंथन आसान हो जाएगा। अमृतपान आप कर लीजिए तो आप में उनसे जीतने की शक्ति आ जाएगी और समस्या का निवारण हो जाएगा। 

 

dhanteras

 

रूपांतरण के अर्थात् : दैनिक भास्कर ने भगवान धन्वंतरि की जयंती (धनतेरस) की पूर्व संध्या पर समुद्र मंथन से धन्वंतरि के प्रकटोत्सव के नाट्य रूपांतरण का विनम्र प्रयास किया, ताकि युवा पीढ़ी धनतेरस के पौराणिक संदर्भ से परिचित हो सके और बड़े-बुजुर्गों से सीख-आशीर्वाद लेने को सदा तत्पर रहें।

 

dhanteras

 

सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद में लक्ष्मी पूजा का उल्लेख 

 

  • धनतेरस, रूप चौदस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाईदूज। यह धरती के सबसे पुराने त्योहार हैं। करीब ढाई हजार से पांच हजार साल पुराने। इसका लिखित इतिहास तो नहीं है, पर लोक परंपराओं में अनवरत उल्लेेख है। समय के साथ परंपराएं जुड़ती गईं और यह पर्व से त्योहार और त्योहार से उत्सव की संस्कृति में बदल गया। 
  • धरती के सभी त्योहार सभ्यताओं और धर्मों से निकले हैं। मिस्र की मैसोपोटामिया सभ्यता 10 हजार साल पुरानी है। पर उसके पारंपरिक त्योहारों के आगे बढ़ने के साक्ष्य नहीं हैं। 5 हजार साल पुरानी मोहनजोदड़ो दूसरी सबसे पुरानी सभ्यता है। वहां मूर्ति और दीये मिले हैं। करीब 3500 साल पहले लिखे गए ऋग्वेद के श्रीसूक्त में भी लक्ष्मी पूजा का उल्लेख है। 
  • ईसाइयों के सबसे पुराने त्योहार गुड फ्राइडे, क्रिसमस 1700 साल पहले शुरू हुए। इस्लाम 1400 साल पहले अस्तित्व में आया। बौद्ध धर्म भी 2400 साल पुराना है। यानी सभ्यता और धर्म दोनों से मिले त्योहारों के लिहाज से दीपोत्सव दुनिया का सबसे प्राचीन पर्व है। 

 

धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा 

धन्वंतरि को आयुर्वेद का अविष्कारक कहा गया है। विष्णु पुराण में निरोगी काया को ही सबसे बड़ा धन माना गया है। धन्वंतरि त्रयोदशी के दिन ही अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इसे धनत्रयोदशी या धनतेरस कहते हैं। वे सोने के कलश के साथ आए थे। इसलिए इस दिन बर्तन और सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है। पांच दिन का दीप उत्सव भी धनतेरस से ही शुरू होता है। इस दिन घरों को स्वच्छ कर, लीप-पोतकर, चौक और रंगोली बनाकर सायंकाल दीपक जलाकर लक्ष्मीजी का आह्वान किया जाता है। 

Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..