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दीपावली आज / राम के घर लौटने पर कैसा रहा होगा दृश्य? भास्कर ने रामचरित मानस के अनुसार किया रूपांतरण

Dainik Bhaskar

Nov 07, 2018, 06:22 AM IST


Diwali scene visualization and recreation of epic poem Ramcharitmanas
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  • घरों और प्रतिष्ठानों में आज धन की देवी लक्ष्मी का आह्वान किया जाएगा
  • शुभ मुहूर्त में लक्ष्मी, गणेश आैर सरस्वती की पूजा करने की परंपरा

आज दीपावली है। लोग घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में धन की देवी लक्ष्मी की पूजा कर धन-धान्य और वैभव की कामना करेंगे।

 

श्री यानी जय। भगवान राम के साथ कई जय जुड़ी हुई हैं। दीपावली पिता के वचन की खातिर 14 बरस वन में रहकर घर लौटे बेटे के स्वागत भर का पर्व नहीं है। यह उत्सव है संघर्ष का जो राम ने छोटे-छोटे लोगों को इकट्ठा करने से लेकर बलशाली दशानन के संहार तक जिया और किया। इस संघर्ष यात्रा के कई संदेश हैं, कई सीखें हैं और उपदेश भी। सब के सब आज भी प्रासंगिक हैं...

 

दिवाली

 

भगवान राम की संघर्ष यात्रा के कई संदेश, कई सीखें 

 

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जीवन में रामराज्य के अर्थ

 

  • निरंतर प्रयास, सार्थक परिणाम : मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने सतत् प्रयास के बूते ही जीत हासिल की थी।
  • समृद्ध राष्ट्र, ऊंची साख : रामराज्य में समृद्धि निवास करती थी।
  • हर हाथ को काम : राम ने गिलहरी से लेकर बंदर-भालू सबको काम देकर रामसेतु का निर्माण करवाया था।
  • अनिश्चितता का अंत : रामराज्य में अनिश्चितता की गुंजाइश नहीं थी।

 

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन
 

  • लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां पूर्व या पश्चिम में रखें। लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। 
  • कलश को चावल पर रखें। दो बड़े दीपक रखें। एक घी व दूसरा तेल का। सभी पूजन सामग्री सजाएं। 
  • सभी सामग्री पर व खुद पर गंगाजल छिड़ककर हाथ में पुष्प, अक्षत और थोड़ा जल लेकर भगवान का ध्यान करें। पूजन का संकल्प लें। गणेशजी व गौरी का पूजन फिर कलश पूजन करें। आरती करें।

 

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आरती करने से पहले ये मंत्र बोलें 
या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी: 
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा 
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥

 

अर्थ - जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप से, पापियों के यहां दरिद्रतारूप से, शुद्ध अन्त:करणवाले पुरुषों के हृदय में बुद्धिरूप से, सत्पुरुषों में श्रद्धारूप से तथा कुलीन मनुष्य में लज्जारूप से निवास करती हैं, उन महालक्ष्मी को हम नमस्कार करते हैं। देवी! आप सम्पूर्ण विश्व का पालन कीजिए।

 

लक्ष्मी जी की आरती 
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

 

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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