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मान्यताः रामायण के युद्ध से जुड़ी है इस गांव की कहानी, लक्ष्मण को बचाने के लिए संजीवनी बूटी लेने उत्तराखंड के पहाड़ों पर आए थे हनुमान

उत्तराखंड का एक गांव जहां नहीं होती हनुमानजी की पूजा

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 05:24 PM IST

रिलिजन डेस्क. कलियुग के जीवित देवता माने जाते हैं भगवान हनुमान। कोई भी संकट हो, भगवान हनुमान की पूजा से सब दूर हो जाते हैं। देश-दुनिया में हनुमानजी को मानने वाले भक्तों की कोई कमी नहीं है। लेकिन, भारत में एक गांव ऐसा भी है, जहां हनुमानजी की पूजा करने पर प्रतिबंध है। पूरे गांव में कोई भगवान हनुमान की पूजा नहीं करता है। ये गांव है उत्तराखंड के द्रौणागिरी। इसका कारण भी रामायण की ही एक घटना से जुड़ा है।

जब मेघनाद के बाण से लक्ष्मण घायल हो गए थे और उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी की जरूरत थी। तब हनुमान हिमालय से संजीवनी बूटी का पहाड़ उठा लाए थे। इस गांव के लोगों की मान्यता है कि भगवान हनुमान जो पहाड़ उठाकर ले गए थे वो इसी द्रौणागिरी गांव में था। यहां उसकी पूजा होती थी। संजीवनी का पहाड़ ले जाने के कारण यहां के लोग हनुमानजी की पूजा नहीं करते। यहां हनुमानजी के प्रतीक लाल झंडे लगाने पर भी प्रतिबंध है।

dronagiri village of uterakhand where worship of lord hanuman is banned
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dronagiri village of uterakhand where worship of lord hanuman is banned
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