दशहरा 2018 : सीता हरण से पहले रावण अपने मामा मारीच के पास गया और झुककर प्रणाम किया तो मारीच ने सोचा कि अब मेरा बुरा समय आ गया है / दशहरा 2018 : सीता हरण से पहले रावण अपने मामा मारीच के पास गया और झुककर प्रणाम किया तो मारीच ने सोचा कि अब मेरा बुरा समय आ गया है

dainikbhaskar.com

Oct 13, 2018, 05:18 PM IST

जब बुरे लोग आपके सामने झुके तो तुरंत हो जाएं सावधान, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

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रिलिजन डेस्क। शुक्रवार, 19 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। इस साल दशहरे की तिथि के संबंध में पंचांग भेद भी हैं। कुछ जगहों पर 18 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। ये बुराई पर अच्छाई का पर्व है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरित मानस में रावण और मारीच का एक प्रसंग है। जिसमें बताया है कि अगर कोई बुरा व्यक्ति हमारे सामने झुकता है तो हमें सावधान हो जाना चाहिए।

नवनि नीच कै अति दुखदाई यानी नीच लोगों का नमन, नीच लोगों का झुकना, नीच लाेगों का नमस्कार करना दुखदाई होता है। नीच लोग जब भी हमारे सामने झुकते हैं तो इसका मतलब यही है कि वे हमसे कुछ चाहते हैं। इन लोगों की इच्छा पूरी करने पर हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यहां जानिए रावण और मारीच का पूरा प्रसंग...

जब मारीच के सामने झुका रावण

जब रावण सीता का हरण करने के लिए लंका से निकलता है तो सबसे पहले वह अपने मामा मारीच के पास पहुंचता है और उसे नमस्कार करता है। मारीच रावण को झुका देखकर समझ जाता है कि अब भविष्य में कोई संकट आने वाला है।

श्रीरामचरित मानस में लिखा है कि-

नवनि नीच कै अति दुखदाई। जिमि अंकुस धनु उरग बिलाई।।

भयदायक खल कै प्रिय बानी। जिमि अकाल के कुसुम भवानी।।

दोहे का अर्थ- रावण को इस प्रकार झुके हुए देखकर मारीच सोचता है कि किसी नीच व्यक्ति का नमन करना भी दुखदाई होता है। मारीच रावण का मामा था, लेकिन रावण राक्षसराज और अभिमानी था। वह बिना कारण किसी के सामने झुक नहीं सकता था। मारीच ये बात जानता था और उसका झुकना किसी भयंकर परेशानी का संकेत था। तब भयभीत होकर मारीच ने रावण को प्रणाम किया।

मारीच सोचता है कि जिस प्रकार कोई धनुष झुकता है तो वह किसी के लिए मृत्यु रूपी बाण छोड़ता है। जैसे कोई सांप झुकता है तो वह डंसने के लिए झुकता है। जैसे कोई बिल्ली झुकती है तो वह अपने शिकार पर झपटने के लिए झुकती है। ठीक इसी प्रकार रावण भी मारीच के सामने झुका था। किसी नीच व्यक्ति की मीठी वाणी भी बहुत दुखदायी होती है, यह ठीक वैसा ही है जैसे बिना मौसम का कोई फल। मारीच अब समझ चुका था कि भविष्य में उसके साथ कुछ बुरा होने वाला है।

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