दशहरा 2018/ पंचांग और तिथि-नक्षत्र के अनुसार कब मनाएं विजयादशमी पर्व, जानिए क्या करें इस दिन

3 वर्ष पहले
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काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि आश्विन महीने के  शुक्लपक्ष की दशमी तिथि को श्रवण नक्षत्र होने से विजया दशमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन सायंकाल में तारा उदय होने के समय विजयकाल रहता है। वह सब कामों को सिद्ध करता है। तिथि-नक्षत्रों का ये संयोग इस बार 19 अक्टूबर काे बन रहा है। दशहरे पर अपराजिता (एक प्रकार का पौधा) की पूजा की जाती है। पूजा के बाद उसके सफेद या नीले फूल अपने पास रखने से हर जगह जीत मिलती है।

 

क्यों खास होता है विजयकाल - 

विजयकाल यानि दिन की समाप्ति और रात्रि की शुरुआत के पहले का समय। इस काल में भगवान श्रीराम की पूजा की जाती है। ये समय रावण को जलाने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है, क्योंकि इस समय अच्छाई की बुराई पर जीत हुई थी। शस्त्र पूजन भी विजयकाल में ही किया जाता है। इसके अलावा मां दुर्गा ने इसी समय महिषासुर को मारा था इसलिए महिषासुर मर्दिनी के रुप में उनकी पूजा करनी चाहिए।

 

क्या करें इस दिन - 

 

1 - सुबह नीलकंठ पक्षी को देखना चाहिए।

 

2 - सुबह तांबे के लोटे में पानी भरकर उसमें कच्चा दूध, जौ, तिल और चावल मिलाकर पीपल के पेड़ में चढ़ाएं।

 

3 - शाम के समय श्रीराम और हनुमान मंदिर में लाल ध्वजा (झंडा) लगाएं और हनुमान जी के पैर का सिदूर अपने सिर पर लगाएं।

 

4 - शाम के समय शमी के पौधे के नीचे तेल का दीपक लगाएं।

 

5 - शाम को देवि कालिका, भगवान श्रीराम और हनुमान जी के मंदिर में दीपक लगाएं। उसके बाद अपने घर के बाहर भी दीपक लगाएं।

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