दशहरा / श्रीराम ने 10 बाण रावण के सिरों पर, 20 बाण हाथों पर और 1 बाण नाभि पर मारा था



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  • विभीषण ने किया था रावण का अंतिम संस्कार, माता सीता को लेने गए थे हनुमानजी

Dainik Bhaskar

Oct 07, 2019, 05:46 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 8 अक्टूबर को दशहरा है। त्रेता युग में इसी तिथि पर श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीरामचरित मानस के अनुसार श्रीराम ने 31 बाण एक साथ रावण को मारे थे। इन 31 बाणों में से 1 बाण रावण की नाभि पर लगा, बाकी 30 बाणों से उसके 10 सिर और 20 हाथ धड़ से अलग हो गए। जैसे ही रावण का विशाल धड़ पृथ्वी पर गिरा तो पृथ्वी हिलने लगी थी। जानिए रावण के वध के बाद की खास बातें...
श्रीराम के सभी बाण उनके तरकश में आ गए थे वापस
श्रीराम के 31 बाणों से रावण के सिर और हाथ कट गए थे। सभी बाणों ने रावण के सिरों और हाथों को मंदोदरी के सामने छोड़ दिया था। ये देखकर मंदोदरी बेहोश हो गई थी। इसके बाद सभी बाण वापस श्रीराम के तरकश में वापस आ गए थे।
लक्ष्मण ने समझाया विभीषण को
बड़े भाई रावण की मृत्यु के बाद विभीषण बहुत दुखी थे। तब श्रीराम के कहने पर लक्ष्मण ने विभीषण को समझाया कि दुख न करें। कुछ समय बाद विभीषण का दुख शांत हुआ। इसके बाद श्रीराम के कहने पर विभीषण ने रावण का अंतिम किया। श्रीराम का वनवास चल रहा था, इस कारण उन्होंने लंका नगर में प्रवेश नहीं किया। श्रीराम ने लक्ष्मण, हनुमानजी, सुग्रीव, अंगद, नल, नील, जाम्बवान् आदि को बुलाया और इन सभी से कहकर विभीषण का राजतिलक करवा दिया था।
माता सीता के लेने गए थे हनुमान
विभीषण का राजतिलक हो गया, उसके बाद श्रीराम ने हनुमानजी से कहा वे सीता को कुशलता का समाचार सुनाए और उन्हें यहां लेकर आए। हनुमानजी ने लंका में प्रवेश किया और माता सीता को लेकर श्रीराम के पास पहुंचे। इसके बाद सीता की अग्नी परीक्षा हुई और श्रीराम, लक्ष्मण सहित सभी अयोध्या की ओर पुष्पक विमान से चल दिए।

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