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मुस्लिम पर्व / हजरत मोहम्मद पैगंबर का जन्मदिन मिलाद उन नबी 10 नवंबर को



Eid Milad Un Nabi on 10 November, its celebrated on the occasion of the birthday of Hazrat Mohammad Prophet
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Eid Milad Un Nabi on 10 November, its celebrated on the occasion of the birthday of Hazrat Mohammad Prophet

  • इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार साल भर में मनाई जाती हैं 3 ईद 

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2019, 06:38 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मीलाद उन नबी मनाया जाता है जिसे ईद मिलादुन्नबी कहा जाता है। माना जाता है इस दिन मक्का शहर में 571 ईस्वी में पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब का जन्म हुआ था। इसी की याद में ईद मिलादुन्नबी का पर्व मनाया जाता है। इस साल ये दिन अंग्रजी कैलेंडर के अनुसार 10 नवंबर को है। काजी डॉ. उरूज अहमद के अनुसार मीलाद उन-नबी शब्द अरबी के मौलिद शब्द से बना है। मौलिद का अर्थ जन्म होता है। अरबी भाषा में मौलिद उन नबी का मतलब हज़रत मुहम्मद का जन्मदिन होता है। धीरे-धीरे इसे मीलाद उन-नबी कहा जाने लगा। लगभग सभी मुस्लिम देशों में मीलाद उन नबी का जश्न मनाया जाता है।  

 

  • साल भर में 3 ईद

ईद अरबी शब्द है। उर्दू और फारसी में भी इसका उपयोग होता है। ईद का हिन्दी अर्थ पर्व या त्योहार है। अरबी, उर्दू और फारसी में भी ईद का अर्थ खुशी या हर्षोल्लास होता है। मुस्लिम धर्म यानी इस्लामी कैलेंडर के अनुसार साल में 3 ईद मनाई जाती हैं। पहली ईद उल-फ़ित्र जो कि रमजान के रोजों के बाद शव्वाल महीने की पहली तारीख को मनाई जाती है। इसे मीठी ईद भी कहा जाता है। इस दिन खीर बनाई जाती है और खुशी मनाते हुए सबको खिलाई भी जाती है। इसके बाद इस्लामी कैलेंडर के आखरी महीने की दसवीं तारीख को ईद-उल-अज़हा मनाया जाता है। इसे बक़र-ईद भी कहा जाता इसी दिन हज भी अदा किया जाता है। इसके अलावा इस्लामिक कैलेंडर के तीसरे महीने रबी-अल-अव्वल की 12वीं तारीख को मीलाद उन नबी मनाया जाता है जिसे ईद मिलादुन्नबी कहा जाता है। ये ईद पैगंबर हजरत मुहम्मद साहब के जन्मदिन की खुशी में मनाई जाती है।

 

  • इस्लाम में 2 ही त्योहार मनाए जाते थे 

काजी डॉ. उरूज अहमद के अनुसार पैगंबर हजरत मोहम्मद जब मक्का से हिजरत यानी पलायन करके मदीना गए तो देखा कि वहां के लोग शराब पीकर और जुआ खेलकर त्योहार मनाते और हुड़दंग मचाते थे। उनकी इस हरकत को देखकर पैगंबर मुहम्मद दुखी हुए। इसके बाद उन्होंने मदीना के मुसलमानों को समझाया कि अल्लाह ने तुम्हारे लिए खुशी के इससे बेहतर दो दिन मुकर्रर किए हैं। एक ईदुल फितर मतलब मीठी ईद और दूसरा ईदुल अजहा यानी बकरईद का दिन। यानी मुहम्मद साहब ने मुसलमानों को सिर्फ दो त्योहार मनाने की सीख दी थी। बाद में पैगम्बर हजरत मोहम्मद साहब के जन्मदिन के मौके पर ईद मीलाद-उन-नबी मनाने का सिलसिला शुरू हुआ।

 

  • कैसे मनाया जाता है ईद मिलाद उन नबी

इस दिन पैगंबर मोहम्मद हजरत साहब द्वारा दी गई शिक्षा को पढ़ा जाता है और उन्हें याद किया जाता है। मोहम्मद हजरत साहब के द्वारा किए गए सभी अच्छे कामों को याद किया जाता है। बच्चों को पैगंबर मोहम्मद साहब के बारे में तालीम दी जाती है। ईद मिलाद उन नबी पर रात भर प्रार्थनाएं चलती हैं। पैगंबर मोहम्मद साहब के प्रतीकात्मक पैरों के निशान पर प्रार्थनाएं की जाती हैं। मोहम्मद साहब की शान में बड़े जुलूस निकाले जाते हैं। इस्लाम का सबसे पवित्र ग्रंथ कुरान भी इस दिन पढ़ा जाता है। इसके अलावा लोग मक्का मदीना और दरगाहों पर जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन को नियम से निभाने से लोग अल्लाह के और करीब जाते हैं। लोग आपस में खुशिया मनाते हैं और खुद को अल्लाह का करम महसूस करते हैं।

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