शनिवार / ग्रहों के न्यायाधीश शनिदेव हैं मकर और कुंभ के स्वामी, हर शनिवार की जाती है इनकी विशेष पूजा



facts about shani dev, shani puja, shani sadesati and dhayya
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  • शनि कर्म प्रधान देवता हैं, हम जैसा कर्म करते हैं, वैसा ही फल देते हैं शनिदेव

Jun 29, 2019, 03:23 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। ज्योतिष में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु, कुल नौ ग्रह बताए गए हैं। इन नौ ग्रहों में शनिदेव को न्यायाधीश माना गया है। यही ग्रह हमारे कर्मों का फल प्रदान करता है। शनि सूर्यदेव के पुत्र हैं और मकर-कुंभ राशि के स्वामी हैं। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार शनिवार का कारक ग्रह शनि है। इसीलिए इस दिन शनिदेव की पूजा की जाती है। यहां जानिए शनिदेव से जुड़ी खास बातें...

  • कर्म प्रधान देवता हैं शनि

    शनिदेव को कर्म प्रधान देवता माना जाता है यानी ये ग्रह हमें हमारे कर्मों का फल प्रदान करता है। अगर कोई व्यक्ति गलत काम करता है तो उसे साढ़ेसाती और ढय्या में शनिदेव वैसा ही फल प्रदान करते हैं। शनिदेव सूर्यदेव के पुत्र हैं और इनकी माता का नाम छाया है। यमराज इनके भाई और यमुना इनकी बहन है।

  • परिश्रम करने वाले लोगों पर नहीं होता है शनि का बुरा असर

    शनिदेव उन लोगों के लिए शुभ रहते हैं जो परिश्रम करते हैं, अनुशासन में रहते हैं, धर्म का पालन करते हैं और सभी का सम्मान करते हैं। कभी भी किसी गरीब व्यक्ति को न सताएं और अपने माता-पिता का अनादर न करें, वरना हमारे लिए शनि की स्थिति अशुभ हो जाती है।

  • शनि के लिए करना चाहिए तेल का दान

    शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए हर शनिवार सरसों का तेल दान करना चाहिए। काले तिल, काली उड़द और काले वस्त्रों का दान भी करें। ये सभी चीजें शनि से संबंधित हैं। शनिदेव का स्वरूप भी काला ही है, इसीलिए इन्हें काली चीजें विशेष प्रिय हैं। शनिदेव को तेल चढ़ाते समय ध्यान रखें कि कि तेल इधर-उधर गिरना नहीं चाहिए। शनिवार को जूते-चप्पल दान करना भी शुभ माना गया है।

  • हनुमानजी के भक्तों पर नहीं होता शनि का बुरा असर

    शनि और हनुमानजी से जुड़ी एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार प्राचीन समय में शनिदेव ने हनुमानजी को युद्ध के लिए ललकारा था। इस युद्ध में हनुमानजी ने शनि को पराजित कर दिया था। युद्ध की वजह से शनि को भयंकर पीड़ा हो रही थी। तब उन्हें शरीर पर लगाने के लिए हनुमानजी ने तेल दिया था। तेल लगाते ही शनि को आराम मिल गया। तभी से शनि को तेल चढ़ाने की परंपरा चल आ रही है। इस प्रसंग के बाद से शनिदेव हनुमानजी के भक्तों पर टेढ़ी नजर नहीं डालते हैं।

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