पत्नी के कहने पर एक बेटा अपने पिता को अनाथ आश्रम छोड़कर घर लौट रहा था, कुछ देर बाद वह फिर से अनाथालय गया तो उसने देखा कि उसके पिता एक वृद्ध से गले मिल रहे थे और दोनों बहुत खुश थे

माता-पिता अपने बच्चों के सुख के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर देते हैं और फिर भी खुश रहते हैं

dainikbhaskar.com

Apr 17, 2019, 08:52 PM IST
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रिलिजन डेस्क। प्रचलित लोक कथा के अनुसार किसी गांव में एक परिवार में एक व्यक्ति अपनी पत्नी और पिता के साथ रहता था। पिता की उम्र ज्यादा हो गई थी, इस कारण वे बीमार रहने लगे थे। ससुर की बीमारी के कारण व्यक्ति की पत्नी को घर में ज्यादा काम करना पड़ता था। एक दिन महिला ने अपने पति से कहा कि आप पिताजी को किसी अनाथ आश्रम में छोड़ आओ, अब मैं उनकी देखभाल नहीं कर सकती। वहां ऐसी व्यवस्था कर देना कि पिताजी त्योहारों पर भी वहीं रहें, हमारे घर न आए।

> पत्नी की बात मानकर वह व्यक्ति अपने पिता को अनाथ आश्रम में छोड़कर घर लौट रहा था। तभी उसे याद आया कि अनाथालय के अधिकारी को बताना है कि त्योहारों पर भी पिताजी को यहीं रखना है। ये बात करने करने के लिए वह फिर से अनाथ आश्रम पहुंच गया।

> आश्रम में पहुंचकर उसने देखा कि उसके पिता और अनाथालय के वृद्ध अधिकारी बहुत प्रेम से गले मिल रहे हैं और दोनों बहुत खुश हैं। ये देखकर बेटे को बहुत हैरानी हुई कि इतनी जल्दी इन दोनों में इतना प्रेम कैसे हो गया?

> अधिकारी से मिलकर व्यक्ति के पिता अपने कमरे में चले गए। तभी उस वृद्ध का बेटा अधिकारी के पास आया और उससे पूछा कि आप मेरे पिताजी को कब से जानते हैं?

> अधिकारी ने जवाब दिया कि मैं इन्हें पिछले 30 सालों से जानता हूं। 30 साल पहले ये व्यक्ति इसी आश्रम से एक बच्चा गोद ले गए थे। ये सुनते ही बेटे को समझ आ गया, वह उसके पिता की संतान नहीं है, बल्कि अनाथ है। मेरे सुख के लिए इन्होंने अपना सब कुछ समर्पित कर दिया। मेरी ही खुशी के लिए ये चुपचाप अनाथ आश्रम में रहने के लिए भी तैयार हो गए। मैंने एक महान इंसान के साथ बहुत गलत किया है।

> उसे अपनी गलती का एहसास हो गया और वह अपने पिता से क्षमा मांगने लगा। उन्हें फिर से अपने घल ले आया और पत्नी को भी समझा दिया कि अब से पिताजी यहीं रहेंगे।

प्रसंग की सीख

इस प्रसंग की सीख यह है कि माता-पिता अपने बच्चों के लिए अपने सुख का त्याग कर देते हैं। संतान को किसी बात की परेशानी न हो, इसीलिए अपना सब कुछ समर्पित कर देते हैं। संतान को भी ये बात समझनी चाहिए और माता-पिता का आदर करना चाहिए।

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