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पितृपक्ष / मोक्ष दायिनी भूमि है गया, यहां है धर्मराज यम, ब्रह्मा, शिव एवं विष्णु का वास



Pitru Paksha Shradh 2019 Gaya; Shraddha Paksha - Pind Daan in Gaya, Shradh, moksha at GayaJi (Place Of Pind Daan)
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Pitru Paksha Shradh 2019 Gaya; Shraddha Paksha - Pind Daan in Gaya, Shradh, moksha at GayaJi (Place Of Pind Daan)

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2019, 11:24 AM IST

जीवन मंत्र डेस्क. आश्विन कृष्णपक्ष की प्रतिपदा से शुरू होकर अमावस्या तक की अवधि को पितृपक्ष माना जाता है। वैदिक परंपरा और हिंदू मान्यताओं के अनुसार पितरों के लिए श्रद्धा से श्राद्ध करना एक महान और उत्कृष्ट कार्य है। मान्यता के मुताबिक पुत्र का पुत्रत्व तभी सार्थक माना जाता है, जब वह अपने जीवन काल में जीवित माता-पिता की सेवा करे और उनके मरणोपरांत उनकी मृत्यु तिथि तथा महालय यानी पितृपक्ष में उनका विधिवत श्राद्ध करे। इसके लिए देवताओं द्वारा मनुष्यों को धरती पर पवित्र जगह दी गई है। जिसका नाम गया है। यहां श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों को तृप्ति मिलती है तथा उनका मोक्ष भी हो जाता है। महाभारत में वर्णित गया में खासतौर से धर्मराज यम, ब्रह्मा, शिव एवं विष्णु का वास माना गया है।

 

  • श्राद्ध का अर्थ 

अपने पितरों के प्रति श्रद्धा प्रकट करना। पुराणों के अनुसार, मृत्यु के बाद भी जीव की पवित्र आत्माएं किसी न किसी रूप में श्राद्ध पक्ष में अपने परिजनों को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आती हैं। पितरों के परिजन उनका तर्पण कर उन्हें तृप्त करते हैं। इस बार 13 सितंबर यानी अाज से श्राद्ध पक्ष शुरू हो रहे हैं।

 

  • भगवान राम ने किया था यहां श्राद्ध

गया जाकर पितरों का श्राद्ध करने से सात पीढ़ियों का उद्धार होता है। माना जाता है कि यहां भगवान विष्णु पितृदेवता के रूप में मौजूद हैं, इसलिए इसे पितृ तीर्थ भी कहा जाता है। पिंडदान को मोक्ष प्राप्ति का एक सहज और सरल मार्ग माना जाता है। माना जाता है कि भगवान राम और सीताजी ने भी राजा दशरथ की आत्मा की शांति के लिए गया में ही पिंडदान किया था।

 

गयासुर के शरीर से बनी गया

  • पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भस्मासुर के वंश में गयासुर नामक राक्षस ने कठीन तपस्या कर ब्रह्माजी से वरदान मांगा था कि उसका शरीर देवताओं की तरह पवित्र हो जाए और लोग उसके दर्शन से ही पाप मुक्त हो जाएं। इस वरदान के बाद स्वर्ग में अधर्मियों की संख्या बढ़ने लगी। इससे बचने के लिए देवताओं ने गयासुर से यज्ञ के लिए पवित्र स्थल की मांग की। 
  • गयासुर ने अपना शरीर देवताओं को यज्ञ के लिए दे दिया। यज्ञ के बाद जब गयासुर लेटा तो उसका शरीर पांच कोस में फैल गया। यही जगह आगे चलकर गया बनी। गयासुर ने देवताओं से वरदान मांगा कि यह स्थान लोगों को तारने वाला बना रहे। जो भी लोग यहां पर किसी की मृत्यु की इच्छा से  तर्पण और पिंडदान करें, उन्हें मोक्ष मिले। यही कारण है कि आज भी लोग अपने पितरों को तारने के लिए पिंडदान के लिए गया आते हैं।
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