हनुमान जयंती पर करना चाहिए सुंदरकांड का पाठ, इससे बढ़ता आत्मविश्वास और दूर होते हैं अनजाने भय

श्रीरामचरित मानस के पांचवे कांड का नाम सुंदरकांड ही क्यों रखा गया है?

dainikbhaskar.com

Apr 17, 2019, 08:00 PM IST
hanuman jayanti 2019, importance of sunderkand reading, shri ramcharit manas

रिलिजन डेस्क। शुक्रवार, 19 अप्रैल को हनुमान जयंती है। मान्यता है कि त्रेता युग में इसी तिथि पर शिवजी के अंशावतार हनुमानजी का जन्म हुआ था। श्रीरामचरित मानस का सुंदरकांड हनुमानजी को समर्पित है। हनुमानजी की सफलता के लिए सुंदरकांड को याद किया जाता है। जो भक्त सुंदरकांड का पाठ करता है, उसका आत्मविश्वास बढ़ता है, सभी तरह के भय दूर होते हैं। श्रीरामचरित मानस के इस पांचवें अध्याय को लेकर लोग अक्सर चर्चा करते हैं कि इस अध्याय का नाम सुंदरकांड क्यों रखा गया है? उज्जैन के श्रीराम कथाकार पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए सुंदरकांड से जुड़ी खास बातें...

श्रीरामचरित मानस में हैं 7 कांड

श्रीरामचरित मानस में कुल 7 कांड यानी अध्याय हैं। सुंदरकांड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। श्रीराम की बाललीला का बालकांड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या कांड, जंगल के जीवन का अरण्य कांड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा कांड, लंका के युद्ध का लंका कांड और जीवन से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर उत्तरकांड में दिए गए हैं।

सुंदरकांड का नाम सुंदरकांड क्यों रखा गया?

हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका बनी हुई थी। इसी अशोक वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इस कांड की यही सबसे प्रमुख घटना थी, इसलिए इसका नाम सुंदरकाण्ड रखा गया है।

सुंदरकांड के पाठ से प्रसन्न होते हैं हनुमानजी

माना जाता है कि सुंदरकांड के पाठ से बजरंग बली की कृपा बहुत ही जल्द प्राप्त हो जाती है। जो लोग नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं, उनके सभी दुख दूर हो जाते हैं। इस कांड में हनुमानजी ने अपनी बुद्धि और बल से सीता की खोज की है। इसी वजह से सुंदरकांड को हनुमानजी की सफलता के लिए याद किया जाता है।

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