लाइफ मैनेजमेंट / हनुमानजी सिखाते हैं, बल और बुद्धि के बीच हमेशा होना चाहिए सही संतुलन



Hanumanji Teaches That There Should Always be Perfect Balance Between Force And Intellect
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Hanumanji Teaches That There Should Always be Perfect Balance Between Force And Intellect

Dainik Bhaskar

Jun 04, 2019, 11:28 AM IST

जीवन मंत्र डेस्क. राम भक्त हनुमान एक कुशल प्रबंधक भी हैं। वे मानव संसाधन का बेहतर उपयोग करना जानते हैं। मैनेजमेंट गुरुओं के मुताबिक, संपूर्ण रामचरित मानस में ऐसे कई उदाहरण हैं जिससे साबित होता है कि महाबली हनुमान में मैनेजमेंट की जबर्दस्त क्षमता थी। हनुमानजी को समर्पित सुंदरकांड में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र है जो यह बताती हैं कि उन्होंने कैसे बल और बुद्धि का उपयोग करते हुए माता सीता की खोज की थी। हनुमानजी ने एक ही रास्ते में आने वाली दो समस्याओं को अलग-अलग तरीके से निपटाया। जहां झुकना था वहां झुके, जहां बल का प्रयोग करना था, वहां वो भी किया। जानते हैं हनुमान जी से मिलने वाले लाइफ मैनेजमेंट के संदेशों के बारे में।

 

  • लक्ष्य हासिल करने तक नहीं करना चाहिए विश्राम 

जामवंत से प्रेरित हनुमान समुद्र लांघने के लिए चल पड़ते हैं। वे आकाश में उड़ रहे थे। तभी समुद्र ने सोचा कि हनुमान थक गए होंगे, उसने अपने भीतर रह रहे मैनाक पर्वत से कहा कि तुम हनुमान को विश्राम दो। मैनाक पर्वत ने हनुमानजी से कहा कि आप थक गए होंगे, थोड़ी देर मुझ पर विश्राम करें। हनुमानजी ने  निमंत्रण का मान रखते हुए उसे सिर्फ छू लिया और कहा कि रामजी का काम किए बगैर मैं विश्राम नहीं कर सकता। मैनाक का मान भी रह गया। हनुमान आगे चल दिए। रुके नहीं, लक्ष्य नहीं भूले। हमें भी उनकी ये बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए। जब तक लक्ष्य न मिल जाए, तब तक विश्राम नहीं करना चाहिए।

 

  • अगर लक्ष्य के लिए झुकना पड़े तो झुक जाइए 

सीता की खोज में समुद्र लांघ रहे हनुमान को बीच रास्ते में सुरसा नाम की नाग माता ने रोक लिया और उनको खाने की जिद की। हनुमानजी ने बहुत मनाया,लेकिन नहीं मानी। वचन भी दे दिया, राम का काम करके आने दो, फिर खुद ही आकर आपका आहार बन जाऊंगा, लेकिन सुरसा नहीं मानी। हनुमानजी समझ गए कि मामला मुझे खाने का नहीं है, सिर्फ अहम का है। उन्होंने तत्काल सुरसा के बड़े स्वरुप के आगे खुद को छोटा कर लिया। उसके मुंह में से घूम कर निकल आए। सुरसा खुश हो गई और लंका का मार्ग प्रशस्त कर दिया। हनुमान जी के इस उदाहरण से हमें सीख मिलती है कि जहां मामला अहम का हो, वहां बल नहीं, बुद्धि का इस्तेमाल करना चाहिए। बड़े लक्ष्य को पाने के लिए अगर कहीं झुकना भी पड़े, झुक जाइए।

 

  • समय रहते काम करना जरूरी 

जब हनुमानजी लंका के द्वार पर पहुंचे, वहां लंकिनी नाम की राक्षसी मिली। रात के समय हनुमान छोटा रूप लेकर लंका में प्रवेश कर रहे थे, लंकिनी ने रोक लिया। यहां परिस्थिति दूसरी थी, लंका में रात के समय ही चुपके से घुसा जा सकता था। समय कम था, उन्होंने लंकिनी से कोई वाद-विवाद नहीं किया। सीधे ही उस पर प्रहार कर दिया। लंकिनी ने रास्ता छोड़ दिया। इससे सीख मिलती है कि जब मंजिल के करीब हों, समय का अभाव हो और परिस्थितियों की मांग हो तो बल का प्रयोग करना अनुचित नहीं है।

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