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स्वर्ण मंदिर, 19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था

9 महीने पहले
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जीवन मंत्र डेस्क। मंगलवार, 12 नवंबर को सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव की जयंती और कार्तिक मास की पूर्णिमा भी है। ये दिन सिख और हिन्दू धर्म के लिए बहुत खास है। इस साल गुरुनानक की 550वीं जयंती है। सिख श्रद्धालु इस दिन सभी गुरुद्वारों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। पंजाब के अमृतसर में स्थित स्वर्ण मंदिर दुनियाभर के प्रमुख गुरुद्वारों में से एक है। यहां देश-विदेश से हर धर्म के लोग पहुंचते हैं और पूरी आस्था के साथ सिर झुकाते हैं। इसे हरमंदिर साहिब भी कहा जाता है।
यहां प्रचलित मान्यता के अनुसार पुराने समय में स्वर्ण मंदिर को कई बार नष्ट किया गया। हर बार भक्तों ने इसे फिर से बनाया। मंदिर को कब-कब नष्ट किया गया और कब-कब बनाया गया, ये जानकारी मंदिर में देखी जा सकती है। 19वीं शताब्दी में अफगान हमलावरों ने इस मंदिर को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इसके बाद महाराजा रणजीत सिंह ने इसे दोबारा बनवाया और सोने की परत से सजाया था। इसी वजह से इसे स्वर्ण मंदिर कहा जाता है। सिक्ख धर्म में गुरु को ही ईश्वर के समान माना जाता है। स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से पहले लोग मंदिर के सामने सिर झुकाते हैं, फिर पैर धोने के बाद सी‍ढ़ि‍यों से मुख्य मंदिर तक पहुंचते हैं। सीढ़ि‍यों के साथ-साथ स्वर्ण मंदिर से जुड़ी घटनाएं और इतिहास लिखा हुआ है।
मान्यताओं के अनुसार इस गुरुद्वारे का नक्शा लगभग 400 साल पहले गुरु अर्जुन देव जी ने तैयार किया था। यह गुरुद्वारा वास्तु कला की बहुत ही सुंदर मिसाल है। मंदिर में की गई नक्काशी और सुंदरता सभी का मन मोह लेती है। गुरुद्वारे में चारों दिशाओं में दरवाजे हैं। मंदिर में हमेशा लंगर चलता है। यहां प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है। लंगर की पूरी व्यवस्था शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समि‍ति‍ की ओर से की जाती है। हर रोज यहां हजारों लोग लंगर का प्रसाद ग्रहण करते हैं। स्वर्ण मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए श्री गुरु रामदास सराय में ठहरने की व्यवस्था भी है। मंदिर में एक सरोवर भी है। यहां आने वाले सभी श्रद्धालु इस सरोवर में स्नान करते हैं और फिर गुरुद्वारे में मत्था टेकने जाते हैं।

  • वायु मार्ग- अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय स्तर का एयरपोर्ट है। यहां से स्वर्ण मंदिर पहुंचने के लिए आवागमन के कई साधन आसानी से मिल जाते हैं।
  • सड़क मार्ग- अमृतसर दिल्ली से लगभग 500 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। देश के सभी प्रमुख शहरों से अमृतसर तक की बस मिल सकती है।
  • रेल मार्ग- अमृतसर रेल मार्ग से भारत के सभी प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली से अमृतसर के लिए कई ट्रेनें आसानी से मिल जाती हैं। अमृतसर रेलवे स्टेशन से गुरुद्वारे तक पहुंचने के लिए रिक्शा या टैक्सी मिल जाती है।
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