रोचक बात / पूजा के बाद पंचामृत के सेवन से इम्यून सिस्टम होता है मजबूत और बढ़ती है सकारात्मकता



Immune System Makes Strong by Panchamrit And Increase Positivity Also
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Immune System Makes Strong by Panchamrit And Increase Positivity Also

Dainik Bhaskar

May 14, 2019, 06:15 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. पंचामृत का अर्थ पांच अमृत यानी पांच पवित्र वस्तुओं से बना। यह मिश्रण दुग्ध, दही, घृत (घी), चीनी और मधु मिलाकर बनाया गया एक पेय पदार्थ होता है, जो हव्य यानी देवताओं का भोजन बनता है। प्रसाद के रूप में भी इसका बहुत महत्व है। इसी से भगवान का अभिषेक भी किया जाता है। इसको पीने से व्यक्ति के भीतर जहां सकारात्मक भाव पैदा होते हैं, वहीं यह सेहत से जुड़ा मामला भी है। कुछ ग्रंथों में पंचामृत का महत्त्व बताया गया है कि श्रृद्धापूर्वक पंचामृत का पान करने वाले व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। भगवान को चढ़ाए हुए पंचामृत को पीने से मनुष्य जन्म और मरण के बन्धन से मुक्त हो जाता है और मोक्ष प्राप्त करता है।

 

  • पंचामृत का धार्मिक महत्व

1. दूध- यह पंचामृत का प्रथम भाग है। यह शुभता का प्रतीक है यानी हमारा जीवन दूध की तरह निष्कलंक होना चाहिए।

2. दही- इसका गुण है कि यह दूसरों को अपने जैसा बनाता है। दही मिलाने का अर्थ यही है कि पहले हम निष्कलंक हो सद्गुण अपनाएं और दूसरों को भी अपने जैसा बनाएं।

3. घी- यह स्निग्धता और स्नेह यानी प्रेम का प्रतीक है। सभी से हमारे प्रेमपूर्ण संबंध हों, यही भावना है।

4. शहद- यह शक्ति प्रदान करता है। तन और मन से शक्तिशाली व्यक्ति ही सफलता पा सकता है।

5. चीनी- इसका गुण है मिठास, चीनी मिलाने का अर्थ है जीवन में मिठास घोलें।

 

  • वैज्ञानिक लाभ

 

1. पंचामृत का सेवन शरीर के लिए बेहद सेहतमंद रहता है।

2. पंचामृत कम मात्रा में ही लेना चाहिए, जैसे प्रसाद के रुप में 1 या 3 चम्मच।

3. इसमें तुलसी का एक पत्ता डालकर इसका नियमित सेवन करते रहने से किसी भी तरह का रोग नहीं होता।

4. पंचामृत के सेवन से संक्रामक रोग दूर रहते हैं और इम्यून सिस्टम मजबूत होता है।

5. इससे चेहरे की रंगत निखरती है और लालिमा बनी रहती है।

 

  • पंचामृत से जुड़ी ध्यान रखने वाली बातें

 

1. पंचामृत आप जिस दिन बनाएं उसी दिन खत्म कर दें। अगले दिन के लिए न रखें।

 

2. पंचामृत हमेशा दाएं हाथ से ग्रहण करें, इस दौरान अपना बायां हाथ दाएं हाथ के नीचे सटा कर रखें।

 

3. पंचामृत को ग्रहण करने से पहले उसे सिर से लगाएं, फिर ग्रहण करें। इसके बाद हाथों को सिर पर न लगाएं।

 

4. पंचामृत हमेशा चांदी के पात्र से देना चाहिए। चांदी में रखा पंचामृत इतना शुद्ध हो जाता है कि अनेकों बीमारियों को हर सकता है। इसमें मिले तुलसी के पत्ते इसकी गुणवत्ता को और बढ़ा देते हैं। ऐसा पंचामृत ग्रहण करने से बुद्धि स्मरण शक्ति बढ़ती है।

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