खास बातेंः तिरुपति बालाजी मंदिर को यूं ही नहीं कहा जाता है सबसे अलग, यहां भगवान खुद हुए थे भक्त के लिए प्रकट, खास कारण से इन्हें कहा जाता है व्यंकटेश्वर / खास बातेंः तिरुपति बालाजी मंदिर को यूं ही नहीं कहा जाता है सबसे अलग, यहां भगवान खुद हुए थे भक्त के लिए प्रकट, खास कारण से इन्हें कहा जाता है व्यंकटेश्वर

Dainikbhaskar.com

Oct 13, 2018, 04:35 PM IST

तिरुपति बालाजी में क्यों करते हैं बालों का दान, जानें यहां की 5 अनोखी बातें

importance of tirupati balaji temple andhra pradesh 5 special points

रिलिजन डेस्क. वैसे तो दक्षिण भारत के सभी मंदिर अपनी भव्यता और सुंदरता के लिए मशहूर हैं, लेकिन तिरुपति बालाजी का मंदिर सबसे ज्यादा लोकप्रिय है। तिरुपति बालाजी का मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में है। इस मंदिर को भारत का सबसे धनी मंदिर माना जाता है, क्योंकि यहां पर रोज करोड़ों रुपये का दान आता है। इसके अलावा भी बालाजी में कुछ बातें ऐसी हैं, जो सबसे अनोखी है। आइए, उन खास बातों के बारे में जानते हैं….

1. इसलिए किया जाता है यहां बालों का दान

मान्यता है कि जो व्यक्ति अपने मन से सभी पाप और बुराइयों को यहां छोड़ जाता है, उसके सभी दुःख देवी लक्ष्मी खत्म कर देती हैं। इसलिए, यहां अपनी सभी बुराइयों और पापों के रूप में लोग अपने बाल छोड़ जाते है।

2. भक्तों को नहीं दिया जाता तुलसी पत्र

सभी मंदिरों में भगवान को चढ़ाया गया तुलसी पत्र बाद में प्रसाद के रूप में भक्तों को दिया जाता है। अन्य वैष्णव मंदिरों की तरह यहां पर भी भगवान को रोज तुलसी पत्र चढ़ाया तो जाता है, लेकिन उसे भक्तों को प्रसाद के रूप में नहीं दिया जाता। पूजा के बाद उस तुलसी पत्र को मंदिर परिसर में मौजूद कुंए में डाल दिया जाता है।

3. क्यों कहते हैं भगवान विष्णु को व्यंकटेश्वर

इस मंदिर के बारे में कहा जाता हैं कि यह मेरूपर्वत के सप्त शिखरों पर बना हुआ है, इसकी सात चोटियां शेषनाग के सात फनों का प्रतीक कही जाती है। इन चोटियों को शेषाद्रि, नीलाद्रि, गरुड़ाद्रि, अंजनाद्रि, वृषटाद्रि, नारायणाद्रि और व्यंकटाद्रि कहा जाता है। इनमें से व्यंकटाद्रि नाम की चोटी पर भगवान विष्णु विराजित हैं और इसी वजह से उन्हें व्यंकटेश्वर के नाम से जाना जाता है।

4. पूरी मूर्ति के दर्शन होते हैं सिर्फ शुक्रवार को

मंदिर में बालाजी के दिन में तीन बार दर्शन होते हैं। पहला दर्शन विश्वरूप कहलाता है, जो सुबह के समय होते हैं। दूसरे दर्शन दोपहर को और तीसरे दर्शन रात को होते हैं। भगवान बालाजी की पूरी मूर्ति के दर्शन केवल शुक्रवार को सुबह अभिषेक के समय ही किए जा सकते हैं।

5. रामानुजाचार्य को यहीं पर बालाजी ने दिए साक्षात दर्शन

यहां पर बालाजी के मंदिर के अलावा और भी कई मंदिर हैं, जैसे- आकाश गंगा, पापनाशक तीर्थ, वैकुंठ तीर्थ, जालावितीर्थ, तिरुच्चानूर। ये सभी जगहें भगवान की लीलाओं के जुड़ी हुई हैं। कहा जाता हैं कि श्रीरामानुजाचार्य जी लगभग डेढ़ सौ साल तक जीवित रहे और उन्होंने सारी उम्र भगवान विष्णु की सेवा की। जिसके फलस्वरूप यहीं पर भगवान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए थे।

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