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गुरू नानक जयंती विशेष / पाकिस्तान में है ये गुरुद्वारा, भारतीय बार्डर से दूरबीन द्वारा भक्त करते हैं इसके दर्शन



interesting story about kartaarpur guridwara pakistan
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Dainik Bhaskar

Nov 23, 2018, 11:23 AM IST

रिलिजन डेस्क. 23 नवंबर को सिक्खों के पहले गुरु नानकदेवजी की जयंती है। इस मौके पर हम आपको एक ऐसे गुरुद्वारे के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखने के लिए भारतीयों को दूरबीन की मदद लेनी पड़ती है। यह गुरुद्वारा पाकिस्तान के नारोवाल जिले में है और इसका नाम है करतारपुर साहिब। गुरु नानकदेवजी ने ही करतारपुर को बसाया था और यहीं उनकी मृत्यु भी हुई। यहीं गुरु नानकदेव की समाधि भी है।

जानें इसकी खास बातें

  1. दूरबीन से करते हैं करतारपुर साहिब के दर्शन

    पाकिस्तान में होने की वजह से भारत के नागरिकों को करतारपुर दर्शन के लिए वीजा की जरूरत होती है। जो लोग पाकिस्तान नहीं जा पाते वे भारतीय सीमा में डेरा बाबा नानक स्थित गुरुद्वारा शहीद बाबा सिद्ध सैन रंधावा में दूरबीन की मदद से करतारपुर साहिब का दर्शन करते हैं। पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब भारतीय सीमा से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है।
     

  2. पाकिस्तानी सरकार कटवाती है हाथी घास

    भारत और पाकिस्तान के बॉर्डर के नजदीक बने इस गुरुद्वारे के आसपास अक्सर हाथी घास काफी बड़ी हो जाती है। जिसे पाकिस्तान अथॉरिटी छंटवाती है ताकि भारतीय सीमा से यहां के दर्शन हो सकें।

  3. गवर्नर ने दी गुरु नानकदेवजी को जमीन

    तत्कालीन गवर्नर दुनी चंद की मुलाकात गुरु नानकदेवजी से होने पर उन्होंने 100 एकड़ जमीन गुरु साहिब के लिए दी थी। 1522 में यहां एक छोटी झोपड़ीनुमा स्थल का निर्माण कराया गया।

  4. यहीं से हुई थी लंगर की शुरुआत

    गुरु नानकदेवजी ने लंगर की शुरुआत भी यहां से की। गुरु नानकदेवजी ने गुरु का लंगर ऐसी जगह बनाया, जहां पुरुष और महिला का भेद खत्म किया जा सके। यहां दोनों साथ बैठकर भोजन करते थे।
     

  5. पटियाला के राजा ने करवाया था करतारपुर साहिब का निर्माण

    करतारपुर गुरुद्वारा साहिब का भव्य निर्माण पटियाला के महाराजा सरदार भूपिंदर सिंह ने करवाया था। 1995 में पाकिस्तान सरकार ने इसकी मरम्मत कराई थी और 2004 में इसे पूरी तरह से संवारा गया।

  6. कौन थे गुरू नानक देव?

    गुरु नानक देव का अवतरण संवत्‌ 1526 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। कुछ विद्वान गुरु नानक की जन्मतिथि 15 अप्रैल, 1469 मानते हैं। नानक जी का जन्म रावी नदी के किनार स्थित तलवंडी नामक गांव खत्रीकुल में हुआ था। गुरु नानक देव के पिता का नाम मेहता कालू और माता का नाम तृप्ता देवी था। नानक देव की बहन का नाम नानकी था। गुरु नानक ने सिख धर्म की स्थापना की थी। गुरु नानक सिखों के आदिगुरु हैं। बचपन के समय में कई चमत्कारिक घटनाएं घटी जिन्हें देखकर गांव के लोग इन्हें दिव्य व्यक्तित्व वाले मानने लगे। नानक देव ने समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करने के लिए अनेक यात्राएं की थी।

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