दोहे / किसी भी काम में हमें धैर्य रखना चाहिए, कोई भी पौधा समय आने पर ही फल देता है



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  • संत कबीर के दोहों में छिपे होते हैं सुखी जीवन के सूत्र

Dainik Bhaskar

Jun 29, 2019, 04:03 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। संत कबीर ने जीवन में सुख और सफलता पाने के कई सूत्र अपने दोहों में बताए हैं। कबीर के दोहे काफी प्रसिद्ध है, इनमें छिपे सूत्रों को अपनाने से कोई भी व्यक्ति सफल और सुखी हो सकता है। यहां जानिए कबीर के कुछ खास दोहे...
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय॥

इस दोहे में कबीरदास कहते हैं कि हमें हर काम में धैर्य रखना चाहिए। किसी भी काम का फल तुरंत नहीं मिलता है। अगर कोई माली किसी पौधे में एक साथ सौ घड़े पानी डाल देगा, तभी भी उसमें फल तो समय आने पर ही लगेंगे।
साईं इतना दीजिए, जा मे कुटुंब समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु ना भूखा जाय॥

कबीर कहते हैं कि भगवान मुझ पर इतनी कृपा करें कि मेरा परिवार सुखी रहे और कोई भी भूखा न रहे। मेरे घर आने वाला साधु भी भूखा न जाए।
कबीरा ते नर अंध है, गुरु को कहते और।
हरि रुठे गुरु ठौर है, गुरु रुठे नहीं ठौर॥

इस दोहे में गुरु की महिमा बताई गई है। कबीर के अनुसार इंसान अंधा है, उसे कुछ भी जानकारी नहीं है। सब कुछ गुरु ही बताता है। अगर कभी भगवान रुठ जाए तो गुरु भगवान को मनाने का उपाय बताता है। अगर गुरु ही रुठ जाए तो हमारी मदद कोई नहीं करता है।
माया मरी न मन मरा, मर-मर गए शरीर।
आशा तृष्णा न मरी, कह गए दास कबीर।।

इस दोहे में कबीर कहते हैं कि इंसान की इच्छाएं कभी नहीं मरती है, चाहे उसकी मृत्यु हो जाए। सुख पाने की आशाएं हमेशा हमारे मन में रहती हैं।

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