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महाभारत / पूरे परिवार को भुगतना पड़ी थी युधिष्ठिर की गलती की सजा, इस प्रसंग से आप सीख सकते हैं लाइफ मैनेजमेंट



life management tips according to mahabharat
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life management tips according to mahabharat

Dainik Bhaskar

Dec 05, 2018, 03:27 PM IST

रिलिजन डेस्क. आजकल परिवार में सामंजस्य बैठा पाना सबसे बड़ी चुनौती है क्योंकि कहीं पिता-पुत्र में नहीं बनती तो कहीं भाई-भाई की बात नहीं सुनता। परिवार के सदस्यों के सामंजस्य न बैठ पाने के कई कारण हो सकते हैं जैसे- एक-दूसरे से सोच न मिलना, परिवार की जिम्मेदारियों को लेकर मनमुटाव, जनरेशन गेप आदि। ऐसे मामलों में अंतत: एक परिवार अनेक परिवारों में बंट जाता है। इसका असर आने वाली पीढ़ी पर पड़ता है। बच्चे संयुक्त परिवार के प्यार से वंचित रह जाते हैं। अगर कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो परिवार में सामंजस्य बनाया जा सकता है।

ये सूत्र इस प्रकार हैं

  1. युधिष्ठिर की एक गलती भारी पड़ी पांडवों पर

    घर का मुखिया सिर्फ परिवार ही नहीं चलाता है, उसके कर्मों पर ही परिवार का भविष्य टिका होता है। मुखिया का एक गलत निर्णय परिस्थितियों को पूरी तरह विपरीत कर सकता है। परिवार का मुखिया पंक्ति में खड़े पहले व्यक्ति की तरह होता है। जो जैसा खड़ा होता है, कतार में शेष लोग भी वैसे ही खड़े होते हैं। अगर आप पंक्ति में पहले खड़े हैं तो सावधान हो जाइए। परिवार चलाना भी ऐसा ही काम है।

  2. धर्मराज के थे अवतार युधिष्ठिर

    युधिष्ठिर परिवार के मुखिया थे। महाभारत में उन्हें धर्मराज भी कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे धर्म का विशेष ज्ञान रखते थे, लेकिन इसके बाद भी उन्होंने एक बहुत बड़ी गलती कर दी, जिसके कारण पांडवों को वनवास जाना पड़ा और दु:ख भोगने पड़े। जुआ खेलने की लत सिर्फ युधिष्ठिर को थी। दुर्योधन से जुआ भी उन्होंने अकेले ही खेला। लेकिन परिणाम सबने भुगता। द्रौपदी का चीरहरण हो गया। पांचों भाइयों को वन में जाना पड़ा। राजपाठ हाथ से चला गया। सुंदर नगर इंद्रप्रस्थ भी दुर्योधन ने जीत लिया।

  3. एक गलती की सजा पूरे परिवार को भोगनी पड़ी

    कर्म सिर्फ एक ही गलत था जुआ। युधिष्ठिर अगर जुआ नहीं खेलते तो शायद इतना अपमानित नहीं होना पड़ता। यदि आप परिवार के मुखिया हैं तो आपकी जिम्मेदारी भी ज्यादा है। निजी आनंद, निजी स्वार्थ के लिए कोई ऐसा काम ना करें, जिसका परिणाम पूरे परिवार को भुगतना पड़े। जब भी कोई निर्णय लें तो यह सोच कर लें कि उसका परिणाम आपके पूरे परिवार को भुगतना पड़ सकता है। कभी भी सिर्फ निजी शौक या हित के लिए ही कोई काम ना करें। हमेशा दूरदृष्टि का उपयोग करें।

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