ग्रंथों की सीख / महाभारत, श्रीकृष्ण ने बताया है कि जब दुश्मन हो आप से ज्यादा ताकतवर तो क्या करना चाहिए

Dainik Bhaskar

Mar 16, 2019, 12:38 PM IST


Mahabharat 2019: Lord Krishna Taught How To Handle Stronger Opponent in Mahabharat Katha
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Mahabharat 2019: Lord Krishna Taught How To Handle Stronger Opponent in Mahabharat Katha
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महाभारत में कई बलशाली राजाओं का वर्णन है। ऐसा ही एक महारथी राजा था जरासंध। जरासंध और श्रीकृष्ण के बीच भी युद्ध हुआ था। इस युद्ध को श्रीकृष्ण ने कूटनीति से जीता था। महाभारत के अनुसार जरासंध मगध यानी  वर्तमान बिहार का राजा था। वह दूसरे राजाओं को हराकर अपने पहाड़ी किले में बंदी बना लेता था। महाभारत के अनुसार भीम ने भी जरासंध के साथ युद्ध किया था और उसे मार दिया था। वहीं श्रीमद्भागवत के अनुसार श्रीकृष्ण और बलराम ने जरासंध से युद्ध किया था। जिससे हम सीख सकते हैं कि दुश्मन हमसे ताकवर हो तो क्या करना चाहिए।

 

  • एक बार जब श्रीकृष्ण और जरासंध के बीच युद्ध चल रहा था। जरासन्ध ने देखा कि श्रीकृष्ण और बलराम तो भाग रहे हैं, तब वह हंसने लगा।
  • बहुत दूर तक दौड़ने के बाद दोनों भाई बहुत ऊंचे प्रवर्शण पर्वत पर चढ़ गए। उस पर्वत का प्रवर्षण नाम इसलिए पड़ा था कि वहां सदा ही मेघ वर्षा किया करते थे।
  • जब जरासन्ध ने देखा कि वे दोनों पहाड़ में छिप गए तब उसने ईंधन से भरे हुए प्रवर्शण पर्वत के चारों ओर आग लगवा कर उसे जला दिया। 
  • जब भगवान् ने देखा कि पर्वत के छोर जलने लगे हैं, तब दोनों भाई जरासन्ध की सेना के घेरे को लांघते हुए बड़े वेग से उस ग्यारह योजन (44 कोस) ऊंचे पर्वत से एकदम नीचे धरती पर कूद आए। 
  • उन्हें जरासन्ध और उसका कोई भी सैनिक नहीं देख सका दोनों भाई वहां से चलकर फिर अपनी समुद्र से घिरी हुई द्वारकापुरी में चले आए।
  • जरासन्ध ने ऐसा मान लिया कि श्रीकृष्ण और बलराम तो जल गए और फिर वह अपनी बहुत बड़ी सेना लौटाकर मगध देश को चला गया।

 

इस युद्ध के माध्यम से कृष्ण हमें कूटनीति सीखा रहे हैं। युद्ध से भागकर कृष्ण ने जरासंध के मन में भ्रम पैदा किया कि उसने अतिशक्तिशाली श्रीकृष्ण और बलराम को मार दिया। इसके अलावा कृष्ण सीखाते हैं कि जब दुश्मन आपसे अधिक बलशाली हो तो पहले अपने आप को इतना मजबूत बनाएं कि उससे लड़ सकें। उसके बाद ही दुश्मन को ललकारें। अगर आप उसका सामना करने के लायक नहीं है तो मैदान छोडऩे में कोई बुराई नहीं है।

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