महाभारत / हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए, तभी हम सुखी रह सकते हैं

mahabharata facts about happy life, life management tips by mahabharata, bhishma pitamah
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  • महाभारत में पांडवों ने भीष्म से पूछा सुखी जीवन का सूत्र, पितामह ने बताया नदी के साथ छोटी घास नहीं बहती है, लेकिन पेड़ बह जाते हैं

दैनिक भास्कर

Sep 03, 2019, 06:55 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। महाभारत में दुखों को करने और जीवन को सुखी बनाने के लिए सूत्र बताए गए हैं। अगर इन सूत्रों को अपना लिया जाए तो हम कई बाधाओं से बच सकते हैं और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। यहां जानिए भीष्म पितामह और पांडवों की एक ऐसी कथा, जिसमें बताया गया है कि हमें हमेशा विनम्र रहना चाहिए।

  • प्रचलित कथा के अनुसार पितामह भीष्म ने सुखी जीवन का रहस्य पांडवों को समझाया था। महाभारत में भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर थे। एक दिन युद्ध समाप्ति के बाद युधिष्ठिर सभी पांडवों और द्रौपदी को लेकर पितामह से मिलने पहुंचे। युधिष्ठिर जानते थे कि पितामह ज्ञान और जीवन संबंधित अनुभव से संपन्न हैं। युधिष्ठिर ने उनसे निवेदन किया कि पितामह, आप हमें जीवन के लिए उपयोगी ऐसी शिक्षा दें, जो हमेशा हमारा मार्गदर्शन करें, हमारा जीवन कैसे हमेशा सुखी रह सकता है? 
  • तब भीष्म ने नदी का उदाहरण देकर सुखी जीवन का रहस्य समझाया। पितामह भीष्म ने कहा कि जब नदी समुद्र तक पहुंचती है तो अपने जल प्रवाह के साथ बडे-बडे वृक्षों को भी बहाकर ले जाती है। एक दिन समुद्र ने नदी से प्रश्न पूछा कि तुम्हारा जल प्रवाह इतना शक्तिशाली है कि उसमें बडे-बडे वृक्ष भी बह जाते हैं। तुम पलभर में उन्हें कहां से कहां ले आती हो, लेकिन क्या कारण है कि छोटी और हल्की घास, कोमल बेलों को और नम्र पौधों को बहाकर नहीं ला पाती हो?
  • इस प्रश्न के जवाब में नदी ने उत्तर दिया कि जब-जब मेरे जल का तेज बहाव आता है, तब घास और बेलें झुक जाती हैं और रास्ता दे देती हैं। लेकिन पेड़ अपनी कठोरता के कारण यह नहीं कर पाते, इसलिए मेरा प्रवाह उन्हें बहा ले आता है।

प्रसंग की सीख
इस छोटे से उदाहरण से हमें सीखना चाहिए कि हम हमेशा विनम्र रहें, तभी हमारा अस्तित्त्व बना रहता है, यही सुखी जीवन का मूल मंत्र है। जो लोग झुकते नहीं हैं, उन्हें दुखों का सामना करना पड़ता है। सभी पांडवों ने भीष्म के इस उपदेश को ध्यान से सुनकर अपने आचरण में उतार लिया।

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