महाभारत / पितामह भीष्म ने पांडवों को मारने की कर दी थी घोषणा, सभी पांडव हो गए थे चिंतित

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  • श्रीकृष्ण अपने साथ द्रौपदी को लेकर पहुंचे भीष्म के पास और बच गया पांडवों का जीवन

Jul 17, 2019, 04:07 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। कौरव और पांडवों के बीच महाभारत युद्ध शुरू हो गया था, लेकिन दुर्योधन को आशा के अनुरूप सफलता नहीं मिली तो उसने कौरवों के सेनापति भीष्म पितामह को लेकर बार-बार व्यंग्य करना शुरू कर दिया था। इस बात से दुखी होकर पितामह ने घोषणा कर दी कि वे कल सभी पांडवों का वध कर देंगे। जब ये बात पांडवों को मालूम हुई तो वे सभी चिंतित हो गए, क्योंकि भीष्म को युद्ध में हराना असंभव था। 

  • उस दिन सूर्यास्त के बाद श्रीकृष्ण द्रौपदी को लेकर भीष्म पितामह से मिलने गए। श्रीकृष्ण शिविर के बाहर ही रुक गए और द्रौपदी से कहा कि अंदर जाकर पितामह को प्रणाम करो। श्रीकृष्ण की बात मानकर द्रौपदी भीष्म पितामह के पास गई और उन्हें प्रणाम किया। भीष्म ने अपनी कुलवधु को अखंड सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद दे दिया।
  • भीष्म ने द्रौपदी से पूछा कि तुम इतनी रात में यहां अकेली कैसे आई हो? क्या श्रीकृष्ण तुम्हें यहां लेकर आए हैं? द्रौपदी ने कहा कि जी पितामह, श्रीकृष्ण शिविर के बाहर खड़े हैं।
  • ये सुनकर भीष्म तुरंत ही द्रौपदी को लेकर शिविर के बाहर आए और श्रीकृष्ण को प्रणाम किया। भीष्म ने श्रीकृष्ण से कहा कि मेरे एक वचन को दूसरे वचन से काट देने का काम आप ही कर सकते हैं।
  • इसके बाद श्रीकृष्ण और द्रौपदी अपने शिविर की ओर चल दिए। रास्ते में श्रीकृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि अब सभी पांडवों को जीवनदान मिल गया है। बड़ों का आशीर्वाद कवच की तरह काम करता है, इसे कोई अस्त्र-शस्त्र भेद नहीं सकता। आज तुमने एक बार पितामह को प्रणाम किया और सभी पांडव सुरक्षित हो गए। अगर तुम रोज भीष्म, धृतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य आदि को प्रणाम करती और दुर्योधन-दुशासन की पत्नियां पांडवों को प्रणाम करती तो युद्ध की स्थिति नहीं बनती। सभी को अपने कुल के वरिष्ठ लोगों को सम्मान करना चाहिए, तभी जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वरना घर में क्लेश होता रहता है।

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