महावीर जयंती / महावीरजी ने दिया था आवश्यकता से अधिक संग्रहण न करने का संदेश



mahavirji had given a message not to collect more than necessary
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mahavirji had given a message not to collect more than necessary

  • जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी की जयंती 17 अप्रैल को

Dainik Bhaskar

Apr 16, 2019, 06:43 PM IST

रिलिजन डेस्क. महावीर स्वामी का जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को हुआ था, इस दिन को महावीर जयन्ती के पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह इस वर्ष 17 अप्रैल को है। भगवान महावीर स्वामी, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, उनका जीवन ही उनका संदेश है। भगवान महावीर महज एक धर्मविशेष के ही तीर्थंकर नहीं वरन एक जीवन दर्शन के, जीवन पद्धित के सजृन करता व युग प्रवर्तक थे।

भगवान महावीर ने हजारों साल पहले समाज की गरीबी की समस्या पर विचार कर ‘अपरिग्रह’ (आवश्यकता से अधिक संग्रहण न करना) के माध्यम से समाज में संसाधनों के न्यायोचित वितरण की व्यवस्था करने हेतु समाज को अपरिग्रह का सिद्धांत दिया।

अपने ही क्रोध से भस्म होता है मनुष्य

  1. मनुष्य का नियन्त्रण कक्ष उसके भीतर

    • महावीर की दृष्टि में मनुष्य का नियन्त्रण कक्ष उसके भीतर ही निहित है। मूल बात वृत्ति की है, दृष्टि की है, हम भीतर से अपने को देखे और उसके सापेक्ष में इस जगत को समझें। महावीर को ज्ञान था कि मनुष्य हारता है तो अपनी ही तृष्णा से हारता है। भस्म होता है तो अपने ही क्रोध से भस्म होता है। उसे उसका ही द्वेष परास्त करता है। अपनी ही बैर भावना में वह उलझता है। उसका अहंकार ही उसके मार्ग का सबसे बड़ा अवरोध है, बाहर तो कुछ है ही नहीं। उसकी सारी उलझनों की उत्पत्ति अंदर से ही हैं। इसलिए महावीर मनुष्य के अन्दर की वृत्ति को सुधारने की बात करते थे।

  2. पंचशील के 5 सिद्धांत

    भगवान महावीर द्वारा दिए गए पंचशील सिद्धान्त ही जैन धर्म का आधार बने हैं। इस सिद्धान्त को अपना कर ही एक अनुयायी सच्चा जैन अनुयायी बन सकता है।

    1. सत्य – सत्य इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और एक अच्छे इंसान को किसी भी हालत में सच का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
    2. अहिंसा – दूसरों के प्रति हिंसा की भावना नहीं रखनी चाहिए। जितना प्रेम हम खुद से करते हैं उतना दूसरों से भी करें। अहिंसा का पालन करें।
    3. अस्तेय – दूसरों की वस्तुओं को चुराना और दूसरों की चीजों की इच्छा करना महापाप है। जो मिला है उसमें ही संतुष्ट रहें।
    4. ब्रहृमचर्य – जीवन में ब्रहमचर्य का पालन करना सबसे कठिन है, जो भी मनुष्य इसको अपने जीवन में स्थान देता है, वो मोक्ष प्राप्त करता है।
    5. अपरिग्रह – ये दुनिया नश्वर है। चीजों के प्रति मोह ही आपके दु:खों का कारण है। सच्चे इंसान किसी भी सांसारिक चीज का मोह नहीं करते हैं।
       

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