Makar Sankranti 2019: सिर्फ पतंगबाजी और तिल-गुड़ का त्योहार नहीं है संक्रांति, हर महीने आती है संक्रांति लेकिन जनवरी में आने वाली मकर संक्रांति क्यों हैं बड़ा त्योहार? / Makar Sankranti 2019: सिर्फ पतंगबाजी और तिल-गुड़ का त्योहार नहीं है संक्रांति, हर महीने आती है संक्रांति लेकिन जनवरी में आने वाली मकर संक्रांति क्यों हैं बड़ा त्योहार?

पिता से प्रेम करने वाले हर इंसान के लिए है ये त्योहार सबसे खास, इसमें छिपा है एक संदेश

Dainikbhaskar.com

Jan 14, 2019, 02:18 PM IST
makar sankranti 2019 news and updates importance of makar sankranti festival

रिलिजन डेस्क. आज मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2019) है। वैसे तो हर महीने 14 से 18 तारीख के बीच एक संक्रांति आती है लेकिन जनवरी में आने वाली मकर संक्रांति सबसे खास मानी जाती है। संक्रांति का अर्थ है संक्रमण। सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है तो उसे संक्रमण कहा जाता है। 15 जनवरी को सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर में प्रवेश करेगा, इसलिए इसे मकर संक्रांति कहा जाता है। क्यों मकर संक्राति मनाई जाती है या सारी संक्रांतियों में इसे ही क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है।

मकर संक्रांति पर दो काम किए जाते हैं एक तो पतंगबाजी और दूसरा तिल-गुड़ का आहार। लेकिन, संक्रांति सिर्फ इन्हीं कामों के लिए नहीं है। इसमें जीवन की खुशियों का एक बहुत गहरा संदेश छिपा है। मकर संक्रांति से उत्तरायण भी शुरू होता है। जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है। वास्तव में, मकर संक्रांति एक बहुत अच्छा संदेश देती है। मकर राशि में सूर्य का प्रवेश करना एक बड़ी घटना है। सूर्य ग्रहों के राजा हैं, शनि उनका पुत्र है। जैसा कि माना जाता है शनि और सूर्य पिता-पुत्र होने के बावजूद भी आपस शत्रु भाव रखते हैं।

मकर और कुंभ शनि की राशियां है, इन राशियों को शनि का घर भी कहा जाता है। यहां सूर्य का प्रवेश करना यानी पिता का पुत्र के घर आना। इसी के साथ उत्तरायण का शुरू होना। यानी उजाले की शुरुआत और देवताओं का दिन शुरू। जब रिश्तों में मधुरता आती है तो जीवन में उजाला आता है। शत्रु भाव होने के बाद भी सूर्य शनि के घर में आए हैं। जीवन में पिता का स्थान देवताओं और गुरुओं की तरह होता है। इनसे आप शत्रु भाव भी रखें तो भी ये आपको आशीर्वाद ही देते हैं। जब उनका आशीर्वाद मिलता है तो ही जीवन में उत्तरायण यानी उजाला होता है। इस लिहाज से, मकर संक्रांति का सबसे ज्यादा महत्व माना जाता है। ये रिश्तों का त्योहार है। रिश्तों में गुड़ की तरह मिठास घुलने का दिन है। रिश्तों में कितना भी मतभेद या मनमुटाव हो। आपको रिश्तों का महत्व समझना जरूरी है। मतभेद भले ही हों, लेकिन एक दूसरे के प्रति प्रेम और स्नेह कम ना हो। अपने से बड़ों का सम्मान करें।

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