मोहिनी एकादशी / पापों का नाश करता है ये व्रत, मोहिनी रुप में होती है भगवान विष्णु की पूजा



Mohini Ekadashi Vrat: It Destroys Sin, Lord Vishnu is Worshiped As Mohini
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Mohini Ekadashi Vrat: It Destroys Sin, Lord Vishnu is Worshiped As Mohini

Dainik Bhaskar

May 14, 2019, 05:55 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार ये व्रत 15 मई यानी आज किया जाएगा। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया था। यह वैशाख शुक्ल एकादशी का दिन था इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा की जाती है और उनका विशेष श्रृंगार किया जाता है। जो व्यक्ति मोहिनी एकादशी का व्रत करता है उसे एक दिन पहले अर्थात दशमी तिथि की रात्रि से ही व्रत के नियमों का पालन करना चाहिए। इस व्रत में सिर्फ फलाहार ही किया जाता है। 

 

  • क्यों धारण किया था मोहिनी रुप 

ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु ने सुमुद्र मंथन के दौरान प्राप्त हुए अमृत को देवताओं में बांटने  के लिए मोहिनी का रूप धारण किया था। जब समुद्र मंथन से अमृत प्राप्त हुआ तो उसके बाद देवताओं और असुरों में आपाधापी मच गई थी। चूंकि ताकत के बल पर देवता द्वारा असुरों को हराना मुश्किल था। इसलिए चालाकी से भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण कर असुरों को अपने मोहपाश में बांध लिया और अमृत का पान देवताओं को करवा दिया। इसके पश्चात् देवताओं ने अमरत्व प्राप्त किया। वैशाख शुक्ल एकादशी के दिन चूंकि यह सारा घटनाक्रम हुआ इस कारण इस एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा गया है।

 

  • पूजा और व्रत की विधि  

 

1. एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नान करें। संभव हो तो गंगाजल को पानी में डालकर नहाना चाहिए। इसके बाद साफ वस्त्र धारण कर विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। 

2. भगवान विष्णु की प्रतिमा के सामने घी का दीप जलाएं तथा पुन: व्रत का संकल्प लें। एक कलश पर लाल वस्त्र बांधकर कलश की पूजा करें। 

3. इसके बाद उसके ऊपर विष्णु की प्रतिमा रखें। प्रतिमा को स्नानादि से शुद्ध करके नए वस्त्र पहनाएं। 

4. पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल पंचामृत और तुलसी के पत्ते चढ़ाने चाहिए।

5.  पीले फूल के साथ अन्य सुगंधित पुष्पों से विष्णु भगवान का श्रृंगार करें। पुन: धूप, दीप से आरती करें और मिष्ठान तथा फलों का भोग लगाएं। रात्रि में भगवान का भजन कीर्तन करें। 

 

  • मोहिनी एकादशी का महत्व

ऐसी मान्यता है कि वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखने से मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं। खासतौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है और यश मिलता है। इस एकादशी के उपवास से मोह के बंधन नष्ट हो जाते हैं, अतः इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है। कुछ ग्रंथों में बताया गया है कि इस एकादशी पर व्रत करने से गौ दान के बराबर पुण्य मिलता है। इस एकादशी का व्रत समस्त पापों का क्षय करके व्यक्ति के आकर्षण प्रभाव में वृद्धि करता है। इस व्रत को करने वाले व्यक्ति की ख्याति चारों ओर फैलती है।

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