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अकबर ने बीरबल से पूछा कि भगवान कहां रहता है, कैसे मिलता है, करता क्या है? बीरबल ने कहा कि इन प्रश्नों के उत्तर तो मेरा पुत्र भी दे सकता है

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 09:52 PM IST

उम्र कोई भी हो, अगर व्यक्ति बुद्धिमान है तो उसे हर जगह मान-सम्मान मिलता है

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रिलिजन डेस्क। अकबर के प्रश्नों और बीरबल के जवाबों से जुड़े किस्से काफी चर्चित हैं। बीरबल बहुत बुद्धिमान थे। अकबर के सवालों के सटीक जवाब बीरबल के पास होते थे। जानिए इन दोनों का ऐसा ही एक रोचक किस्सा, जिसमें अकबर ने बीरबल से भगवान से जुड़े तीन प्रश्न पूछे-

> ईश्वर कहां रहता है? ईश्वर कैसे मिलता है? ईश्वर करता क्या है?

> जब अकबर ने ये प्रश्न पूछे तो बीरबल बहुत आश्चर्यचकित हो गए और उन्हें उस समय इन प्रश्नों का उत्तर समझ नहीं आया। बीरबल ने कहा कि इन प्रश्नों के उत्तर वह कल बताएगा।

> बीरबल इन प्रश्नों को लेकर बहुत चिंतित थे। बीरबर के पुत्र ने चिंता का कारण पूछा तो बीरबल ने अकबर के तीन प्रश्न बता दिए। बीरबल के पुत्र ने कहा कि वह खुद कल दरबार में बादशाह को इन तीनों प्रश्नों के जवाब देगा।

> अगले दिन बीरबल अपने पुत्र के साथ दरबार में पहुंच गया और बादशाह अकबर से बोला कि आपके तीनों प्रश्नों के जवाब तो मेरा पुत्र भी दे सकता है।

> अकबर ने कहा कि ठीक है। बताओ ईश्वर कहां रहता है?

> इस प्रश्न के जवाब के लिए बीरबल के पुत्र ने दूध मंगाया, जिसमें चीनी मिली हुई थी। उसने वह दूध अकबर को दिया और कहा कि आप चखकर बताइए दूध कैसा है?

> अकबर ने चखकर बताया कि दूध मीठा है।

> तब बीरबल के पुत्र ने कहा कि क्या इसमें चीनी दिख रही है?

> अकबर ने कहा कि नहीं, इसमें चीनी तो नहीं दिख रही है। वह तो दूध में घुल गई है।

> बीरबल के पुत्र ने कहा कि जहांपनाह, ठीक इसी तरह ईश्वर भी संसार की हर चीज में घुला हुआ है, लेकिन दूध में घुली हुई चीनी की तरह दिखाई नहीं देता। अकबर इस जवाब से संतुष्ट हो गया।

> अब अकबर ने दूसरा प्रश्न पूछा कि ईश्वर कैसे मिलता है?

> इस प्रश्न का जवाब देने के लिए बीरबल के पुत्र ने दही मंगवाया।

> बीरबल के पुत्र ने अकबर को दही देते हुए कहा कि आपको इसमें मक्खन दिखाई दे रहा है?

> अकबर ने कहा कि दही में मक्खन तो है, लेकिन दही मथने पर ही मक्खन दिखाई देगा।

> बीरबल के पुत्र ने कहा कि जी जहांपनाह, ठीक इसी तरह ईश्वर भी हमारे मन का मंथन करने पर ही मिल सकते हैं।

> अकबर इस जवाब से भी संतुष्ट हो गया।

> अकबर ने तीसरा प्रश्न पूछा कि बताओ ईश्वर करता क्या है?

> बीरबर के पुत्र ने कहा कि जहांपनाह, इस प्रश्न के जवाब के लिए आपको मुझे गुरु मानना होगा।

> अकबर ने कहा कि ठीक है। अब से तुम मेरे गुरु और मैं तुम्हारा शिष्य।

> बीरबल के पुत्र ने कहा कि गुरु हमेशा ऊंचे स्थान पर बैठता है और शिष्य हमेशा नीचे बैठता है।

> अकबर तुरंत ही अपने सिंहासन से उठ गया और बीरबल के पुत्र को सिंहासन पर बैठकर खुद नीचे बैठ गया।

> सिंहासन पर बैठते ही बीरबल के पुत्र ने कहा कि जहांपनाह, यही आपके तीसरे प्रश्न का जवाब है। ईश्वर राजा को रंक बनाता है और रंक को राजा बना देता है।

> अकबर इस जवाब से भी संतुष्ट हो गया। तीनों प्रश्नों के उत्तर सही देने पर बादशाह ने बीरबल के पुत्र को सम्मानित किया।

कथा का सार

व्यक्ति की उम्र कम हो या ज्यादा, अगर वह बुद्धिमान है तो हर जगह मान-सम्मान प्राप्त करेगा। बीरबल की तरह ही उसका पुत्र भी बुद्धिमान था और इसी वजह से उसे भी बादशाह अकबर ने सम्मानित किया। हम भी अपनी बुद्धि का उपयोग करते हुए जीवन की सभी परेशानियां दूर कर सकते हैं। तेज बुद्धि के लिए रोज सुबह मेडिटेशन करना चाहिए।

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