प्रेरक कथा / इंसान की असली पहचान धन-दौलत से नहीं, व्यवहार और आदतों से होती है



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  • एक व्यक्ति राजा से काम मांगने पहुंचा, राजा ने उससे उसकी खासियत पूछी, व्यक्ति ने कहा कि मैं इंसान और जानवरों को देखकर उनके बारे में सबकुछ बता सकता हूं, राजा ने उसे सेवक नियुक्त कर दिया

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2019, 03:48 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। किसी इंसान की असली पहचान धन-दौलत से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और आदतों से होती हैं। इस संबंध में एक कथा प्रचलित है। कथा के अनुसार पुराने समय में किसी राजा के दरबार में एक अनजान व्यक्ति काम मांगने पहुंचा। राजा ने उससे पूछा कि तुम्हारी खासियत क्या है?

  • व्यक्ति ने जवाब दिया कि राजन् मैं किसी भी इंसान और जानवर को देखकर उनके बारे में सबकुछ बता सकता हूं। राजा को ये बात अच्छी लगी और उसे घोड़ों के अस्तबल में नियुक्त कर दिया। सेवक अब शाही घोड़ों की देखभाल करने लगा। कुछ दिन बाद राजा ने अपने सबसे प्रिय घोड़े के बारे में सेवक से पूछा। सेवक ने कहा कि राजन् ये घोड़ा पूरी तरह ऊंची नस्ल का नहीं है। ये सुनकर राजा ने तुरंत उस व्यक्ति को बुलवाया जिससे ये घोड़ा खरीदा था।
  • घोड़े वाले ने राजा को बताया कि राजन् ये घोड़ा है तो ऊंची नस्ल का, लेकिन इसके जन्म के बाद इसकी मां मर गई थी। इसके बाद ये घोड़ा एक गाय का दूध पीकर बड़ा हुआ है।
  • राजा ने अपने सेवक से पूछा कि ये बात तुम्हें कैसे मालूम हुई? सेवक ने बताया कि राजन् ऊंची नस्ल के घोड़े घास खाते समय अपना मुंह ऊपर कर लेते हैं, जबकि ये घोड़ा घास खाते समय अपना मुंह गाय की तरह नीचे ही रखता है।
  • राजा ये बात सुनकर बहुत खुश हुआ। उसने सेवक को बहुत सारा अनाज, गाय, बकरी भेंट कर दिए और उसे अपनी रानी की सेवा में नियुक्त कर दिया।
  • कुछ दिन बाद राजा ने सेवक को बुलाया और उससे रानी के बारे में पूछा। सेवक ने राजा से कहा कि महाराज रानी किसी शाही परिवार से नहीं हैं। ये बात सुनते ही राजा हैरान हो गया। उसने तुरंत ही अपनी सास को बुलवाया। जब सास राजा के सामने पहुंची तो उसने सेवक की बात बताई। राजा की सास ने कहा कि ये बात सही है। जब हमारी यहां पुत्री ने जन्म लिया था, तब आपके पिता और मेरे पति ने आपके साथ उसका रिश्ता पक्का कर दिया था। जब पुत्री 6 माह की हुई तो बीमारी की वजह से मर गई थी। हम नहीं चाहते थे कि आपके परिवार से हमारा रिश्ता टूटे, इसीलिए हमने एक सेविका की बच्ची को गोद ले लिया था। उसी से आपका विवाह हुआ है।
  • राजा ने सेवक से पूछा कि तुम्हें रानी के बारे में ये बात कैसे मालूम हुई। सेवन ने कहा कि राजन् महारानी का व्यवहार सेवकों के प्रति बहुत खराब है। इन्हें ये नहीं मालूम कि किसी सेवक से कैसे बात करनी चाहिए। जबकि शाही परिवार की महिलाएं सेवकों से बहुत अच्छी तरह पेश आती हैं। राजा ये बातें सुनकर खुश हो गया और उसने सेवक को अनाज, गाय और भेड़-बकरियां उपहार में दे दी और उसे अपनी सेवा में नियुक्त कर दिया। कुछ समय बाद एक दिन राजा ने सेवक को बुलाया और अपने बारे में पूछा। सेवक ने कहा कि राजन् मैं सच तो बता दूं, लेकिन आप वचन दें कि मुझे जान से नहीं मारेंगे। राजा ने वचन दे दिया। सेवक ने कहा कि आप राजा हैं, लेकिन शाही परिवार से नहीं हैं।
  • ये बात सुनते ही राजा क्रोधित हो गया, लेकिन अपने दिए वचन के कारण सेवक को छोड़ दिया। राजा तुरंत ही अपनी मां के पास पहुंचा। मां ने कहा कि सेवक की बात सच है। जब हमारी कोई संतान नहीं हो रही तो तुम्हें एक चरवाहे से गोद लिया था।
  • राजा ने सेवक से पूछा कि तुम्हें ये बात कैसे मालूम हुई। सेवक ने बताया कि राजन् जो शाही परिवार से होता है, वह खुश होकर सेवकों को हीरे-जवाहरत भेंट करता है, लेकिन आपने हर बार मुझे अनाज, भेड़-बकरियां ही उपहार में दी हैं। ऐसा कोई चरवाहा ही कर सकता है।

कथा की सीख

  • इस कथा की सीख यह है कि किसी इंसान की पहचान उसकी धन-दौलत से नहीं होती, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और आदतों को देखकर ही हम व्यक्ति की परख सकते हैं। इसीलिए हमें अपना व्यवहार को अच्छा बनाना चाहिए और बुरी आदतों से बचना चाहिए।
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