प्रेरक कथा : गधे ने कहा कि घास नीली होती है, बाघ ने कहा कि घास हरी होती है, बहस बढ़ने लगी तो दोनों राजा शेर के पास पहुंचे, गधे ने कहा कि महाराज घास नीली होती है, लेकिन ये बाघ नहीं मान रहा है, शेर ने कहा कि सही बात है और बाघ को दे दी सजा

किसी मूर्ख के साथ बहस करना बुद्धिमानी नहीं है, वरना नुकसान हमारा ही होता है

dainikbhaskar.com

Mar 11, 2019, 08:22 PM IST
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रिलिजन डेस्क। पुरानी लोक कथा के अनुसार एक जंगल में गधे ने बाघ से कहा कि घास नीली होती है। बाघ ने कहा कि नहीं, नीली नहीं हरी होती है। गधे ने फिर कहा कि तुम गलत बोल रहे हो, घास नीली होती है। बाघ भी अपनी बात पर अड़ा हुआ था। दोनों की बहस बढ़ने लगी। इसके बाद दोनों ने तय किया कि वे जंगल के राजा शेर के पास जाएंगे और उनसे पूछेंगे कि घास का रंग कैसा होता है।

> बाघ और गधा दोनों ही शेर के सामने पहुंच गए। गधे ने जोर से चिल्लाते हुए कहा कि महाराज घास का रंग नीला होता है ना, ये बाघ मान नहीं रहा है, बहस कर रहा है, कृपया न्याय करें, इस बाघ को सजा दीजिए।

> शेर ने कहा कि गधा सही बोल रहा है। इसलिए बाघ को एक साल की सजा दी जाती है। ये सुनते ही बाघ और जंगल के सभी जानवर हैरान रह गए।

> बाघ तुरंत ही शेर के पास पहुंचा और बोला कि महाराज घास तो हरी होती है। इस बात के लिए मुझे एक साल की सजा क्यों दे रहे हैं?

> शेर ने कहा कि घास तो हरी ही होती है। ये मैं भी जानता हूं, लेकिन तुम्हें सजा इस बात के लिए दी जा रही है कि तुम्हारे जैसा बहादुर, साहसी और समझदार प्राणी गधे जैसे मूर्ख प्राणी के साथ बहस कर रहा है, ये गलत है। इसी बात के लिए तुम्हें सजा दी गई है। ध्यान रखो कभी भी किसी मूर्ख के साथ बहस नहीं करनी चाहिए।

प्रसंग की सीख

> इस प्रसंग की सीख यह है कि जो भी बुद्धिमान व्यक्ति किसी मूर्ख के साथ बहस करता है, उसे नुकसान उठाना पड़ता है। अगर हम परेशानियों से बचना चाहते हैं तो मूर्ख व्यक्ति से दूर ही रहना चाहिए और उसके साथ बहस करने की गलती नहीं करनी चाहिए।

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