प्रेरक प्रसंग / रोज-रोज अच्छी बातें पढ़ने-सुनने से हमारी सोच सकारात्मक बनी रहती है

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  • एक लड़के ने संत कबीर से कहा कि मैं समझदार हूं, अच्छा-बुरा समझता हूं, फिर मुझे सत्संग की जरूरत क्यों है?

दैनिक भास्कर

Aug 30, 2019, 05:05 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। संत कबीर के जीवन के कई ऐसे प्रसंग प्रचलति हैं, जिनमें सुखी और सफल जीवन के सूत्र छिपे हैं। अगर इन सूत्रों को अपना लिया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। यहां जानिए ऐसा ही एक प्रसंग...
प्रचलित प्रसंग के अनुसार एक युवक संत कबीर के पास आया और बोला कि गुरुदेव, मैंने मेरी पढ़ाई पूरी कर ली है। मैं समझदार हूं और अपना अच्छा-बुरा समझता हूं। मेरे माता-पिता मुझे लगातार सत्संग में जाने के लिए बोलते रहते हैं। आप ही बताएं जब कि मैं समझदार हूं तो मुझे सत्संग की जरूरत क्यों है?

  • कबीरदास ने लड़के की बात ध्यान से सुनी और बिना कुछ बोले एक हथौड़ी उठाई और पास ही जमीन में गड़े एक खूंटे पर मार दी। ये देखकर युवक वहां से चला गया।
  • अगले दिन फिर वह लड़का कबीर के पास आया और बोला कि मैंने कल एक प्रश्न पूछा था, आपने उत्तर नहीं दिया।
  • कबीर ने फिर खूंटे के ऊपर हथौड़ी मार दी, लेकिन बोले कुछ नहीं। युवक ने सोचा कि शायद इनका मौन व्रत है। वह तीसरे दिन फिर आया और वही प्रश्न पूछा।
  • कबीर ने फिर से खूंटे पर हथौड़ी मार दी।
  • ये देखकर लड़के को गुस्सा आ गया, वह बोला कि आप मेरी बात का जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं? मैं तीन दिन से प्रश्न पूछ रहा हूं।
  • कबीर ने कहा कि मैं तो तुम्हें रोज जवाब दे रहा हूं। मैं इस खूंटे पर हथौड़ी मारकर जमीन में इसकी पकड़ मजबूत कर रहा हूं। अगर मैं ऐसा नहीं करूंगा तो इससे बंधे पशुओं की खींचतान से या ठोकर लगने से ये निकल जाएगा। ऐसा ही काम सत्संग करता है। सत्संग हमारे मनरूपी खूंटे पर निरंतर प्रहार करता है, ताकि हमारी पवित्र भावनाएं सकारात्मक रहें। हर रोज अच्छी बातें पढ़ने और सुनने से हमारा मन बुराई से दूर होता है। सकारात्मकता बढ़ती है। इसलिए सत्संग अनिवार्य है।

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