रामायण / किसी से कुछ काम करवाना हो तो पहले समझाएं और फिर निवेदन करें

Dainik Bhaskar

May 15, 2019, 05:30 PM IST


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  • सुग्रीव ने सभी वानरों से कहा एक माह के अंदर सीताजी को खोज करके वापस आ जाना

जीवन मंत्र डेस्क। दूसरों से काम करना बिल्कुल भी आसान नहीं है। अगर किसी से कुछ काम लेना है तो हम तीन तरीके अपनाए जा सकते हैं। श्रीरामचरित मानस के किष्किंधा कांड में सुग्रीव ने बड़े अच्छे ढंग से ये तीन तरीके अपनाए थे। सीताजी की खोज में वानरों को भेजने के उनके आदेश में तीन स्तर थे- सबसे पहले समझाया, फिर निवेदन किया और फिर डराया।
तुलसीदासजी ने लिखा है कि-
ठाढ़े जहं तहं आयसु पाई, कह सुग्रीव सबहि समुझाई।
राम काजु अरु मोर निहोरा, बानर जूथ जाहु चहुं ओरा।।
जनकसुता कहुं खोजहु जाई, मास दिवस महं आएहु भाई।
अवधि मेटि जो बिनु सुधि पाए, आवइ बनिहि सो मोहि मराएं।।

इस चौपाइयों का अर्थ यह है कि यह श्रीरामजी का काम है और मेरा अनुरोध है, तुम सभी वानर चारों ओर जाकर जानकीजी की खोज करो। महीनेभर में वापस आ जाना। जो इस अवधि में बिना पता लगाए लौटेगा, उसे मैं मृत्युदंड दूंगा।

किसी से काम लेना भी है एक कला

  1. किसी से काम लेना भी एक कला है। इसके लिए जरूरी है कि हम दूसरों को उस काम के बारे में ठीक से समझा सकें। सुग्रीव ने सबसे पहले वानरों से निवेदन किया। सभी लोग सम्मान चाहते हैं, इसीलिए किसी से काम करवाते समय हमारे आदेश में भी निवेदन का भाव होना चाहिए। सुग्रीव ने यही किया था, पहले समझाया, फिर निवेदन किया, लेकिन केवल समझाने या निवेदन करने से भी काम नहीं चलता है, थोड़ी सख्ती भी जरूरी है। अंत में सुग्रीव ने सभी को धमकाया भी था। सुग्रीव ने ये काम बहुत ही अच्छे तरीके से पूरा किया, क्योंकि वहां श्रीराम मौजूद थे। श्रीराम की मौजूदगी यानी शांति, अपनापन, प्रेम, अनुशासन। इन्हीं के साथ इस तरह के निर्णय लेना चाहिए।

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