सीख / व्यक्ति जब तक मोह-माया में फंसा रहेगा, तब तक वह भगवान की ओर ध्यान नहीं दे सकता



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  • शिष्य ने परमहंसजी से पूछा कि भ्रम और कामनाएं कैसे खत्म हो सकती हैं?

Dainik Bhaskar

Nov 04, 2019, 04:25 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। स्वामी विवेकानंद के गुरु रामकृष्ण परमहंस के जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जो सुखी और सफल जीवन के सूत्र बताते हैं। अगर इन सूत्रों को अपना लिया जाए तो जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई बाधाओं से बच सकते हैं। यहां जानिए एक ऐसा प्रसंग, जिसमें ये बताया गया है कि कोई व्यक्ति कब भक्ति नहीं कर पाता है...

  • चर्चित प्रसंग के अनुसार रामकृष्ण परमहंस के एक शिष्य ने पूछा कि इंसान के मन में सांसारिक चीजों को पाने की और इच्छाओं को लेकर व्याकुलता रहती है। व्यक्ति इन इच्छाओं को पूरा करने के लिए लगातार कोशिश करता है। ऐसी व्याकुलता भगवान को पाने की, भक्ति करने की क्यों नहीं होती है?
  • रामकृष्ण परमहंस ने जवाब दिया कि ऐसा अज्ञानता की वजह से होता है। व्यक्ति सांसारिक वस्तुओं को पाने के भ्रम में उलझा रहता है, मोह-माया में फंसे होने की वजह से व्यक्ति भगवान की ओर ध्यान नहीं दे पाता है। इसके बाद शिष्य ने फिर पूछा कि ये भ्रम और काम वासनाओं को कैसे दूर किया जा सकता है?
  • परमहंसजी ने जवाब दिया कि सांसारिक वस्तुएं भोग हैं और जब तक भोग का अंत नहीं होगा, तब तक व्यक्ति भगवान की ओर मन नहीं लगा पाएगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए समझाया कि कोई बच्चा खिलौने से खेलने में व्यस्त रहता है और अपनी मां को याद नहीं करता है। जब उसका मन खिलौने से भर जाता है या उसका खेल खत्म हो जाता है, तब उसे मां की याद आती है। यही स्थिति हमारे साथ भी है।
  • जब तक हमारा मन सांसारिक वस्तुओं और कामनाओं के खिलौनों में उलझा रहेगा, तब तक हमें भी अपनी मां यानी परमात्मा का ध्यान नहीं आएगा। भगवान को पाने के लिए, भक्ति के लिए हमें भोग-विलास से दूरी बनानी पड़ेगी, तभी हम भगवान की ओर ध्यान दे पाएंगे।
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