सीख / दूसरों की बुरी बातों पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बदले की भावना से बचें



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  • वृद्ध पिता ने अपने अपने बेटे से कहा कि गलतियों पर दूसरों को क्षमा कर देना और भूल जाना, सुखी रहोगे

Dainik Bhaskar

Aug 05, 2019, 04:32 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। सुखी जीवन के सूत्र बताने वाली कई लोक कथाएं प्रचलित हैं। अगर इन कथाओं के सूत्रों को जीवन में उतार लिया जाए तो हम कई परेशानियों से बच सकते हैं। यहां जानिए ऐसी एक कथा। पुराने समय में एक व्यक्ति अपनी बुद्धिमानी के कारण गांव में प्रसिद्ध था। गांव के लोग उसके पास समस्याएं लेकर आते और वह व्यक्ति सही हल बताता था। जब वह वृद्ध हो गया तो एक दिन उसे ऐसा लगा कि अब उसका अंतिम समय आ गया है। उसने अपने बेटे को बुलाया और कहा कि मैं तुम्हें चार रत्न देना चाहता हूं। जब तक ये रत्न तुम्हारे पास रहेंगे, तुम्हें हर कदम कामयाबी मिलती रहेगी...
पहला रत्न
पिता ने कहा कि बेटा घर-परिवार में कोई कुछ भी कहे, तुम कभी भी किसी की बुरी बातों पर ध्यान मत देना। कभी भी छोटी-छोटी बातों के लिए किसी से बदला लेने की भावना मत रखना। लोगों को क्षमा कर देना। ये बात घर में खासतौर पर ध्यान रखना।
दूसरा रत्न
जब भी दूसरों की मदद करो तो उसे याद मत रखना। मदद करो और भूल जाओ। किसी से मदद के बदले कुछ पाने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
तीसरा रत्न
किसी भी काम में सफलता के लिए कड़ी मेहनत करना। खुद पर और भगवान पर पूरा भरोसा रखना। भगवान तुम्हारे लिए हमेशा अच्छा ही करेंगे।
चौथा रत्न
हमेशा ध्यान रखना, जिसने जन्म लिया है, उसकी मृत्यु अवश्य होगी। कोई भी व्यक्ति अपने साथ कुछ लेकर नहीं जा सकता। इसीलिए किसी भी वस्तु या सुख-सुविधा का मोह मत रखना। हमेशा वैराग्य भाव जागृत रखना।
जो भी व्यक्ति इन चार रत्नों को अपने पास रखता है यानी इनका ध्यान रखता है, वह हमेशा सुखी रहता है।

 

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