ज्ञान / भगवान हर जगह दिखाई नहीं देते, लेकिन हम उन्हें अनुभव कर सकते हैं



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  • शिष्य ने संत से पूछा अगर ईश्वर कण-कण में हैं तो दिखाई क्यों नहीं देते?

Dainik Bhaskar

Jul 11, 2019, 04:34 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। एक प्रचलित लोक कथा के अनुसार एक संत अपने शिष्यों के साथ धर्म-अध्यात्म पर चर्चा कर रहे थे। तभी एक शिष्य ने संत से पूछा कि गुरुदेव ग्रंथों में लिखा है कि ईश्वर हर जगह मौजूद है। अगर ये बात सच है तो भगवान हमें कभी दिखाई क्यों नहीं देते हैं। हम कैसे मान सकते हैं कि ईश्वर सचमुच हैं और अगर वे हैं तो हम उन्हें कैसे प्राप्त कर सकते हैं?

  • संत ने अपने एक अन्य शिष्य से एक लोटा पानी और थोड़ा सा नमक मंगवाया। शिष्य ने तुरंत ही गुरु की आज्ञा का पालन किया और पानी-नमक लेकर आ गया। वहां मौजूद सभी शिष्य ये सोच रहे थे कि भगवान और नमक-पानी का क्या संबंध है? लेकिन सभी चुपचाप गुरु की ओर देख रहे थे।
  • अब गुरु ने कहा कि पानी में नमक को मिला दो। शिष्य ने वैसा ही किया। संत ने सभी शिष्यों से कहा क्या इस पानी में किसी को नमक दिखाई दे रहा है?
  • सभी शिष्यों ने लोटे में देखा और ना में सिर हिला दिया। इसके बाद गुरु ने कहा कि अब पानी को चखो। शिष्यों ने पानी चखा तो वह खारा था। सभी ने कहा कि पानी में नमक का स्वाद आ रहा है।
  • इसके बाद संत ने शिष्य से कहा कि इस पानी को उबालो। संत के आदेश पर शिष्य ने पानी को उबालना शुरू कर दिया। जब लोटे का पानी भाप बनकर उड़ तब संत ने कहा कि अब इस लोटे में देखो। इसमें क्या दिखाई दे रहा है? शिष्यों ने लोटे में देखकर कहा कि लोटे में नमक के कण दिखाई दे रहे हैं। 
  • ये सुनकर गुरु बोले कि आप सभी ने पानी में नमक का स्वाद अनुभव किया, लेकिन कोई भी पानी में नमक को देख नहीं सका। ठीक इसी तरह ईश्वर भी कण-कण में हैं, लेकिन हम उन्हें देख नहीं सकते, सिर्फ महसूस कर सकते हैं।
  • जिस तरह पानी को गर्म करने का बाद नमक के कण दिखाई दिए, ठीक उसी तरह जब हम ध्यान, भक्ति और तप करते हैं, तब हमें भगवान के दर्शन हो सकते हैं। इसके लिए हमें हमारी बुराइयों को छोड़ना पड़ता है, तभी हम ईश्वर को प्राप्त कर सकते हैं।
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