ज्ञान / किसी के अच्छे रूप-रंग से नहीं, उसके ज्ञान और गुणों को देखकर मिलता है सम्मान

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  • राजा ने कुरूप मंत्री से कहा कि आप बुद्धिमान हैं, लेकिन आप सुंदर भी होते तो अच्छा रहता

दैनिक भास्कर

Sep 05, 2019, 05:15 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। कुछ लोग दूसरों की सुंदरता देखकर उन्हें सम्मान देते हैं और अच्छा समझते हैं, जबकि ये गलत है। किसी भी व्यक्ति की परख उसकी शक्ल देखकर नहीं उसके गुणों को देखकर होनी चाहिए। पुराने समय में एक राजा बहुत सुंदर था। उसे अपने रंग-रूप का बहुत घमंड था। राजा के दरबार के महामंत्री बहुत बुद्धिमान थे, लेकिन वे कुरूप थे। रंग सांवला था, चेहरे पर झुर्रियां थीं।

  • एक दिन राजा ने अपने मंत्री से कहा कि महामंत्री आप बहुत बुद्धिमान हैं, लेकिन आप सुंदर भी होते तो अच्छा होता। महामंत्री ने कहा कि राजन् रूप-रंग तो उम्र के साथ नष्ट हो जाता है, अच्छे इंसान की पहचान उसके गुण और ज्ञान से ही होती है। राजा ने मंत्री से कहा कि क्या आप ये बात साबित कर सकते हैं?
  • मंत्री कहा कि ठीक है महाराज, मैं आपके सामने ये बात कल साबित कर दूंगा। उस समय ग्रीष्म ऋतु के दिन थे और दोपहर में बहुत गर्मी रहती थी। दरबार खत्म होने के बाद महामंत्री ने राजा के पास रखा पानी का मटका हटा दिया और उसकी जगह सोने का कलश रखा और उसमें पानी भर दिया। कलश को कपड़े से ढंक दिया।
  • अगले दिन दरबार लगा। राजा और सभी दरबारी उपस्थित थे। गर्मी की वजह से राजा को प्यास लग रही थी। उसने अपने सेवक से पानी लाने के लिए कहा। सेवक ने तुरंत ही कलश में से पानी भरकर राजा को दिया। पानी पीते ही राजा को गुस्सा आ गया। वह बोला कि इतनी गर्मी में गर्म पानी क्यों दे रहे हो?
  • सेवक डर गया, उसने कलश से कपड़ा हटाया तो वहां सोने का कलश था। सभी दरबारी कलश की सुंदरता की तारीफ करने लगे, लेकिन राजा को क्रोध शांत नहीं हुआ। तभी वहां महामंत्री आए और उन्होंने कहा कि राजन् कल मैंने कहा था कि सुंदरता से ज्यादा महत्व ज्ञान और गुणों का है। सोने का कलश सुंदर है, लेकिन ये पानी ठंडा नहीं कर सकता। जबकि कुरूप काली मटकी पानी को ठंडा रखती है, इसीलिए पीने के पानी के लिए मटकी रखी जाती है सोने का कलश नहीं। ठीक इसी तरह व्यक्ति के गुण उसे उपयोगी बनाते हैं, सम्मान दिलाते हैं, सिर्फ सुंदरता देखकर किसी भी व्यक्ति को परखना गलत होता है। अब आप ही बताएं रूप बड़ा है या गुण और ज्ञान? ये सुनकर राजा को बात समझ आ गई। इसके बाद उसने अपनी सुंदरता पर अभिमान करना छोड़ दिया।

कथा की सीख
इस कथा की सीख यह है कि हमारा रंग-रूप तो उम्र के साथ कम होने लगता है, लेकिन गुण और ज्ञान की वजह से मान-सम्मान बढ़ता रहता है। इसीलिए सुंदरता पर घमंड नहीं करना चाहिए।

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