प्रसंग / जब तक हमारे पास ज्ञान नहीं होगा, तब तक हम किसी को ज्ञान नहीं दे सकते



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  • एक शिष्य ने संत से कहा कि गुरुजी मुझे भी आपकी तरह गुरु बनना है, मैं चाहता हूं कि सभी मेरा भी सम्मान करें

Dainik Bhaskar

Sep 10, 2019, 06:53 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। प्रचलित कथा के अनुसार पुराने समय में एक संत थे, जिनके कई शिष्य थे। वे अपने ज्ञान की वजह से आसपास के क्षेत्र काफी प्रसिद्ध थे। गांव के लोग उनका बहुत सम्मान करते हैं। एक दिन उनके पास एक शिष्य आया, जिसने कुछ दिन पहले ही उनके आश्रम में प्रवेश लिया था। शिष्य ने गुरु से कहा कि मुझे भी आपकी तरह प्रसिद्ध होना है और आपके जैसा ही मान-सम्मान पाना है। मैं भी आपके जैसा गुरु बनना चाहता हूं।

  • नए शिष्य की ये बातें सुनकर गुरु मुस्कुराए और कहा कि लंबी साधना और अपनी योग्यता, ज्ञान के बल पर तुम्हें भी ये सब एक दिन मिल जाएगा। शिष्य ने कहा कि लंबे समय के बाद ही क्यों? मैं अभी अपने शिष्यों को दीक्षा क्यों नहीं दे सकता?
  • संत समझ गए कि शिष्य नासमझ है और इसे कोई उदाहरण देकर ही समझाना पड़ेगा। गुरु ने शिष्य को तख्त से उतरकर नीचे उतरकर खड़ा होने को कहा। शिष्य तख्त से नीचे उतर गया। इसके बाद संत अपने तख्त पर खड़े हो गए और बोले कि पुत्र मुझे ऊपर वाले तख्त पर पहुंचा दो।
  • गुरु की ये बात सुनते ही शिष्य सोचने लगा कि ये तो संभव नहीं है। उसने संत से कहा कि गुरुजी अभी तो मैं खुद नीचे खड़ा हूं तो फिर आपको ऊपर कैसे पहुंचा सकता हूं? इसके लिए तो पहले खुद मुझे ही ऊपर वाले तख्त पर आना पड़ेगा।
  • शिष्य बात सुनकर संत ने कहा कि ठीक इसी तरह अगर तुम किसी को अपना शिष्य बनाकर ऊपर उठाना चाहते हो तो पहले तुम्हारा स्तर ऊंचा होना चाहिए। तुम्हें अपनी सोच को ऊंचा उठाने की जरूरत है। जब तुम ऊंचे स्तर पर पहुंच जाओगे, ज्ञानी बन जाओगे, तभी शिष्य के जीवन को ऊंचा उठा सकते हैं, उनका अज्ञान दूर सकते है। इस उदाहरण से शिष्य को समझ आ गया कि अभी वह बहुत निम्न स्तर पर है और उसे ज्ञानी बनने के लिए कड़ी मेहनत करना होगी, तभी वह किसी गुरु बन सकता है।
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