सीख / लाभ हो या हानि, हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना चाहिए

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  • संत ने भिखारी में को दान में दिया एक गिलास, बाद में संत की पत्नी ने बताया वो चांदी का गिलास है

दैनिक भास्कर

Sep 20, 2019, 02:05 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। पुरानी लोक कथा के अनुसार एक संत कभी भी अपने घर से किसी को खाली हाथ नहीं जाने देते थे। एक दिन किसी भिखारी ने उस संत के घर का दरवाजा खटखटाया। संत ने दरवाजा खोला तो भिखारी को देखकर अंदर कुछ लेने गए। घर में उसे देने के लिए खाने की कोई चीज नहीं थी। तब संत ने रसोई घर में से एक गिलास उठाकर भिखारी को दे दिया।

  • गिलास देखकर भिखारी खुश हो गया और वहां से आगे चला गया। जब ये बात संत की पत्नी को मालूम हुई तो उसने चिल्लाकर कहा कि आपने ये क्या कर दिया, वो गिलास चांदी का था। बहुत महंगा है। आपको कुछ और चीज भिखारी को देनी थी। अनजाने में आपने बड़ा नुकसान कर लिया है। ये बात सुनते ही संत तुरंत दौड़कर भिखारी के पास गए और उससे बोले कि भाई ये गिलास चांदी का है, इसे कम कीमत में मत बेच देना।
  • कुछ देर बाद संत खाली हाथ घर पहुंचे, वे प्रसन्न दिख रहे थे। पत्नी ने पूछा बर्तन लेकर नहीं आए हो तो प्रसन्नता किस बात की है? संत ने कहा कि मैं इस बात का अभ्यास कर रहा हूं कि हमें बड़े से बड़े नुकसान में भी प्रसन्न रहना चाहिए, दुखी और निराश नहीं होना चाहिए। मैंने अनजाने में उस भिखारी को मूल्यवान चीज दे दी, लेकिन दिया हुआ दान वापस नहीं ले सकते, इससे नुकसान हुआ, लेकिन मैं दुखी नहीं हूं।
  • हर स्थिति में प्रसन्न रहें और जो हुआ उसे भगवान की इच्छा मानकर आगे बढ़ना चाहिए।

 

कथा की सीख
इस छोटे से प्रसंग की सीख यह है कि हमें लाभ हो या हानि, हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना चाहिए। हानि होने पर दुखी और निराश नहीं होना चाहिए, तभी हम जीवन में सुखी रह पाते हैं।

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