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जब तक मन में इच्छाएं रहेंगी, हमें शांति नहीं मिल सकती

एक वर्ष पहले
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  • एक सेठ ने संत को दक्षिणा में दी स्वर्ण मुद्राएं और कहा कि गुरुदेव मुझ पर कृपा करें, मेरा मन बहुत अशांत है

जीवन मंत्र डेस्क। एक पुरानी लोक कथा के अनुसार एक बहुत धनवान सेठ था। उसके पास सुख-सुविधा की हर चीज थी, लेकिन उसका मन अशांत था। सेठ रोज पूजा-पाठ करता, मंत्रों का जाप करता, लेकिन उसे सकारात्मक फल नहीं मिले। वह बहुत परेशान रहता था, क्योंकि उसे मन की शांति नहीं मिल रही थी। एक दिन उसके गांव में प्रसिद्ध संत पहुंचे। जब सेठ को ये बात मालूम हुई तो संत से मिलने वह भी पहुंच गया। सेठ ने स्वर्ण मुद्राओं से भरी थैलियां संत के चरणों में रख दी और कहा कि गुरुदेव मुझ पर कृपा करें, मुझे मन की शांति चाहिए।
संत ने सेठ से कहा कि ये सब यहां से हटा लो, मैं गरीबों से दान नहीं लेता हूं। ये सुनकर सेठ को आश्चर्य हुआ। उसने कहा महाराज मैं गांव का सबसे अमीर सेठ हूं, आप मुझे गरीब क्यों बोल रहे हैं? संत ने जवाब दिया कि अगर तू अमीर है तो मुझसे किस बात की कृपा चाहिए?
सेठ ने कहा कि महाराज आपकी कृपा मिल जाएगी तो मैं गांव के आसपास के पूरे क्षेत्र का सबसे अमीर इंसान बन जाऊंगा और मेरे मन को शांति मिल जाएगी। आप मुझे कोई ऐसा उपाय बता दें, जिससे मेरी इच्छाएं पूरी हो जाएं।
संत ने उससे कहा कि भाई तुम्हारी इच्छाओं का कोई अंत नहीं है, अभी क्षेत्र का सबसे अमीर इंसान बनना चाहते हो, फिर बाद में देश का सबसे अमीर सेठ बनना चाहोगे, ऐसे में तुम खुद भिखारियों से अलग क्यों मानते हो? भगवान का दिया इतना कुछ होने के बाद भी तुम्हें और चाहिए, धन के लोभ में तुम्हें कभी भी शांति नहीं मिल सकती है। जब तक हम इच्छाओं का त्याग नहीं करेंगे, तब तक पूजा-पाठ करने के बाद भी हमारा मन शांत नहीं हो सकता है। इसीलिए अगर शांति चाहते हो तो धन का लोभ छोड़ दो।
कथा की सीख
इस कथा की सीख यह है कि हम तक लोभ जैसी बुराइयों में फंसे रहेंगे, तब तक हमें शांति नहीं मिल सकती। सुख-शांति की कामना तभी पूरी होगी, जब हम लालच करना छोड़ देंगे।

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