वैशाली शहर की नगरवधू थी आम्रपाली, उसने बुद्ध से कहा कि तथागत मैं भक्ति साधना करना चाहती हूं, लेकिन मेरे पास समय नहीं है, मेरे लिए आप साधना करें, इसके बाद बुद्ध ने क्या जवाब दिया / वैशाली शहर की नगरवधू थी आम्रपाली, उसने बुद्ध से कहा कि तथागत मैं भक्ति साधना करना चाहती हूं, लेकिन मेरे पास समय नहीं है, मेरे लिए आप साधना करें, इसके बाद बुद्ध ने क्या जवाब दिया

अगर आपको सिद्धि चाहिए तो मेहनत आपको ही करना पड़ेगी, किसी और के भरोसे न रहें

dainikbhaskar.com

Jan 13, 2019, 05:03 PM IST
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रिलिजन डेस्क। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध वैशाली नगर में रुके हुए थे। शहर के और आसपास के लोग बुद्ध के दर्शन करने और उनके प्रवचन सुनने के लिए पहुंच रहे थे। जब ये बात वैशाली शहर की नगरवधू आम्रपाली को मालूम हुई तो वह भी बुद्ध के दर्शन करने पहुंच गई। बुद्ध के प्रवचन सुनकर वह बहुत प्रभावित हुई।


> आम्रपाली ने बुद्ध से कहा कि तथागत मैं भी साधना करना चाहती हूं, लेकिन मेरे पास समय नहीं है। क्या आप मेरे लिए भक्ति साधना कर सकते हैं?
> आम्रपाली की ये बात सुनकर बुद्ध कुछ देर चुप रहे, फिर उन्होंने कहा कि आप एक काम करना, अपने महल में जितने दीपक रोज जलाती हो, अब से उससे पांच गुना अधिक दीपक जलाना, इससे तुम्हारे महल से प्रकाश इस उद्यान तक भी पहुंच जाएगा।
> आम्रपाली ने कहा कि गुरुदेव ये बात मुझे सही नहीं लग रही है। भला मेरे महल से इस उद्यान तक प्रकाश कैसे पहुंच सकता है। रास्ते में कितनी ऊंची-ऊंची इमारते हैं, बड़े-बड़े वृक्ष हैं, इन सब की वजह से प्रकाश यहां तक पहुंच नहीं सकेगा।
> बुद्ध ने कहा, आपने सही कहा है, ठीक इसी प्रकार मेरी साधना की रोशनी आप तक कैसे पहुंच सकती है? जो व्यक्ति भोजन करेगा, पेट उसी का भरता है। इसी तरह जो व्यक्ति साधना करेगा, उसका फल, सिद्धि उसे ही प्राप्त होना है। अगर आपको सिद्धि चाहिए तो आपको ही साधना करना होगी। किसी और के भरोसे रहने से हमें कोई लाभ नहीं मिलेगा।
> आम्रपाली को बुद्ध की ये बात समझ आ गई और वह उनकी शिष्या बन गई।
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