मान्यताएं / पूजा में दीपक को कभी भी खुद नहीं बुझाना चाहिए, गणेशजी को तुलसी न चढ़ाएं



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  • गणेशजी, मां दुर्गा, शिवजी, विष्णुजी और सूर्य को पंचदेव कहा गया है, इनकी पूजा रोज करनी चाहिए

Dainik Bhaskar

Aug 23, 2019, 04:39 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। घर के मंदिर में रोज सुबह-शाम पूजा करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है। इस संबंध में मान्यता है कि पूजा-पाठ करने से दुख तो दूर होते हैं, साथ ही शांति भी मिलती है। पूजा से घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है। शास्त्रों के अनुसार पूजन के लिए कई आवश्यक नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करते हुए पूजा करने पर श्रेष्ठ फल मिल सकते हैं। उज्जैन के इंद्रेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी पं. सुनील नागर के अनुसार जानिए कुछ ऐसी बातें जो पूजा करते समय ध्यान रखनी चाहिए...

  • देवी-देवताओं के सामने धूप, दीप जलाना चाहिए। नैवेद्य यानी भोग लगाना है। पूजा में जलाए गए दीपक को कभी भी खुद नहीं बुझाना चाहिए।
  • भगवान सूर्य की 7, श्रीगणेश की 3, विष्णुजी की 4 और शिवजी की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
  • अगर आप रोज सुबह-शाम घी का एक दीपक घर में जलाएंगे तो घर के कई वास्तु दोष भी दूर हो सकते हैं। इससे पवित्रता बढ़ती है।
  • गणेशजी, मां दुर्गा, शिवजी, विष्णुजी और सूर्य को पंचदेव कहा गया है। सुख की इच्छा रखने वाले हर मनुष्य को प्रतिदिन इन पांचों देवों की पूजा अवश्य करनी चाहिए। किसी भी शुभ कार्य से पहले भी इनकी पूजा अनिवार्य है।
  • शिवजी की पूजा में कभी भी केतकी के फूलों और तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए। सूर्यदेव की पूजा में अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। भगवान श्रीगणेश की पूजा तुलसी के पत्ते नहीं रखना चाहिए।
  • सुबह नहाने के बाद ही पूजन के लिए फूल तोड़ना चाहिए। वायु पुराण के अनुसार जो व्यक्ति बिना नहाए फूल या तुलसी के पत्ते तोड़कर देवताओं को अर्पित करता है, उसकी पूजा देवता ग्रहण नहीं करते है।
  • पूजन में अनामिका उंगली (छोटी उंगली के पास वाली उंगली यानी रिंग फिंगर) से चंदन, कुमकुम, अबीर, गुलाल, हल्दी, मेहंदी भगवान को चढ़ाना चाहिए।
  • गंगाजल, तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र और कमल, ये चारों किसी भी अवस्था में बासी नहीं माने जाते हैं। इसलिए इनका उपयोग पूजन में कभी भी किया जा सकता है। इन चार के अलावा भगवान को कभी भी बासी जल, फूल और पत्ते नहीं चढ़ाना चाहिए।
  • घर में या मंदिर में जब भी कोई विशेष पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वस्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका, सप्त मातृका का पूजन भी अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। इन सभी की पूरी जानकारी किसी ब्राह्मण (पंडित) से प्राप्त की जा सकती है। विशेष पूजन पंडित की मदद से ही करवाने चाहिए, ताकि पूजा विधिवत हो सके।
  • घर में पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज न रखें।

 

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