नृसिंह चतुर्दशी आज / भगवान विष्णु के अवतार नृसिंह को चंदन का लेप क्यों लगाते हैं?



Narasimha jayanti 2019 Simhachalam lakshmi Narsimha temple of vishakhapattanam
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Narasimha jayanti 2019 Simhachalam lakshmi Narsimha temple of vishakhapattanam

  • नृसिंह के साथ ही लक्ष्मी की भी पूजा करें, बोलना चाहिए लक्ष्मी-नृसिंह का मंत्र

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 04:51 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 17 मई को भगवान विष्णु के अवतार नृसिंह का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। प्राचीन समय में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी पर भगवान नृसिंह प्रकट हुए थे। प्रचलित कथाओं के अनुसार असुर राज हिरण्यकशिपु का पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था। इसीलिए हिरण्यकशिपु प्रहलाद पर अत्यचार करता था और कई बार उसे मारने का प्रयास भी किया। भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद को असुर राज से बचाने के लिए एक खंबे से नृसिंह रूप में अवतार लिया। नृसिंह का आधा शरीर सिंह का और आधा इंसान का था। नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिपु का वध किया और संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया।

नृसिंह से जुड़ी खास बातें

  1. कहां है भगवान नृसिंह का खास मंदिर?

    नृसिंह भगवान का सबसे खास मंदिर आंध्रपदेश के विशाखापट्टनम से 16 किमी दूर सिंहाचल पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर के संबंध में मान्यता है कि इसे भगवान नृसिंह के भक्त प्रहलाद ने ही बनवाया था। यहां स्थापित मूर्ति हजारों साल पुरानी मानी जाती है। ये मूर्ति हर समय चंदन के लेप से ढंकी रहती है। मंदिर में नृसिंह भगवान के साथ ही महालक्ष्मी भी हैं। साल में सिर्फ एक बार अक्षय तृतीया पर असली मूर्ति के दर्शन हो पाते हैं, इस दिन मूर्ति पर चंदन का लेप नहीं लगाया जाता है।

  2. प्रतिमा पर चंदन का लेप क्यों लगाया जाता है?

    भगवान नृसिंह का स्वरूप उग्र है, उनकी उग्रता को शांत करने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता है। चंदन की शीतलता की वजह से भगवान का ये स्परूप शांत रहता है। भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए नृसिंह प्रकट हुए थे, उस समय वे उग्ररूप में थे। मान्यता है कि उनके भक्त प्रहलाद ने भगवान का मंदिर बनवाया और उन्हें शीतलता देने के लिए चंदन का लेप लगाने की परंपरा शुरू हुई है। इसीलिए नृसिंह चतुर्दशी पर भगवान को विशेष रूप से चंदन जरूर चढ़ाएं।

  3. नृसिंह भगवान की पूजा में कौन सा मंत्र बोलना चाहिए

    भगवान नृसिंह के साथ ही मां लक्ष्मी की भी पूजा करनी चाहिए। पूजा में लक्ष्मी-नृसिंह मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।

    मंत्र - ऊं श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:। 
    भगवान लक्ष्मी-नृसिंह का अभिषेक केसर मिश्रित दूध से करें। भगवान को पीले वस्त्र और देवी लक्ष्मी को लाल वस्त्र अर्पित करें। चंदन का लेप लगाएं। दीपक जलाएं। आरती करें। भगवान को ठंडी चीजों का भोग लगाएं जैसे- दही, तरबूज, सत्तू आदि। 

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