नृसिंह जयंती / इस दिन भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए लिया था नृसिंह अवतार



Narsingh Jayanthi: On This Day Lord Vishnu Had Taken Narsingh Avatar to Protect Prahalad
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Narsingh Jayanthi: On This Day Lord Vishnu Had Taken Narsingh Avatar to Protect Prahalad

Dainik Bhaskar

May 15, 2019, 05:47 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह शुक्रवार, 17 मई को है। भगवान श्री नृसिंह शक्ति तथा पराक्रम के प्रमुख देवता माने जाते हैं, पौराणिक मान्यता एवं धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इसी तिथि को भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा करने के लिए नृसिंह रूप में अवतार लेकर दैत्यों के राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। अत: इस कारणवश यह दिन भगवान नृसिंह की जयंती के रूप में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

 

  • ब्रह्माजी से मिला था वरदान

ग्रंथों के अनुसार कश्यप नामक ऋषि के दो पुत्र थे। प्रथम पुत्र का नाम हरिण्याक्ष तथा दूसरे पुत्र का नाम हिरण्यकश्यप था। ऋषि की दोनों संतान असुर प्रवृति की थी। आसुरी प्रवृति होने के कारण भगवान विष्णु जी के वराह रूप ने पृथ्वी की रक्षा हेतु ऋषि कश्यप के पुत्र ‘हरिण्याक्ष का वध कर दिया था। भाई की मृत्यु से दुखी तथा क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने प्रतिशोध लेने का संकल्प लिया। उसने कठिन तपस्या कर ब्रह्माजी को प्रसन्न कर यह वरदान प्राप्त कर लिया कि न वह किसी मनुष्य द्वारा मारा जा सकेगा न पशु द्वारा, न दिन में मारा जा सकेगा न रात में, न घर के अंदर न बाहर, न किसी अस्त्र के प्रहार से और न किसी शस्त्र के प्रहार से उसको प्राण का कोई डर रहेगा। इस वरदान ने उसे अहंकारी बना दिया और वह अपने को अमर समझने लगा। उसने इंद्र का राज्य छीन लिया और तीनों लोकों को प्रताड़ित करने लगा। वह चाहता था कि सब लोग उसे ही भगवान मानें और उसकी पूजा करें। उसने अपने राज्य में भगवान विष्णु की पूजा को वर्जित कर दिया।

 

  • खम्बे से प्रकट हुए भगवान

हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद, भगवान विष्णु का उपासक था और यातना एवं प्रताड़ना के बावजूद वह विष्णु की पूजा करता रहा। हिरण्यकश्यप ने अनीति का सहारा लिया तथा अपने पुत्र की हत्या के लिए उसे पर्वत से धकेला गया, जिंदा जलाने का प्रयास किया। हर बार वह भगवान विष्णु की कृपा से बच जाता था। एक दिन गुस्से में उसने प्रह्लाद से बोला, कहां है तेरा भगवान। सामने बुला। प्रह्लाद ने कहा, प्रभु तो कण -कण में व्याप्त हैं। क्रोधित हिरण्यकश्यप ने कहा, अच्छा इस खम्बे में तेरा भगवान छिपा है? प्रह्लाद ने कहा, हां। यह सुन हिरण्यकश्यप ने खम्बे पर गदे से प्रहार किया। तभी खम्बे से भगवान नृसिंह प्रकट हुए और हिरण्यकश्यप को अपने जांघों पर रख उसकी छाती को नखों से फाड़कर उसका वध कर डाला।

 

  • भगवान करते हैं रक्षा

नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास एवं पूजा अर्चना की जाती है। इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए तथा भगवान नृसिंह की विधि-विधान के साथ पूजा अर्चना करें। भगवान नृसिंह तथा लक्ष्मी जी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए। इसके बाद  वेदमंत्रों से इनकी प्राण-प्रतिष्ठा कर शोडशोपचार से पूजन करना चाहिए। भगवान नृसिंह जी की पूजा के लिए फल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम केसर, नारियल, अक्षत व पीताम्बर रखें। गंगाजल, काले तिल, पंचगव्य, व हवन सामग्री का पूजन में उपयोग करें। भगवान नृसिंह को प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्र का जाप करें। इस दिन व्रत करने वाले को सामर्थ्य के अनुसार तिल, स्वर्ण तथा वस्त्रादि का दान देना चाहिए। यह व्रत करने वाला व्यक्ति लौकिक दुःखों से मुक्त हो जाता है। भगवान नृसिंह अपने भक्त की रक्षा करते हैं व उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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