नवरात्र / आदि शक्तिपीठ: कहीं मां से पहले गरीबों को भोज, कहीं महिला प्रवेश वर्जित



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  • कामाख्या शक्तिपीठ में नहीं है देवी की प्रतिमा 
  • पुरी के तारीणी देवी मंदिर में होता है 16 दिन का नवरात्र
  • कोलकाता के कालीधाम में नवमी को दोपहर दो बजे के बाद पुरुषों का मंदिर में प्रवेश होता है वर्जित
  • पुरी के बिमला देवी शक्तिपीठ में मान्यता है कि यहां गिरे थे मां के पद

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2018, 11:25 AM IST

भारत समेत 5 देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल) में 51 शक्तिपीठ हैं। महाकाल संहिता के अनुसार इनमें 4 आदि शक्तिपीठ हैं, जहां देवी शरीर के प्रमुख अंग गिरे थे। बाकी स्थानों पर अन्य अंग गिरे थे। दैनिक भास्कर अपने पाठकों को हर साल कुछ नया और अलग देता आया है। इस बार 4 आदि शक्तिपीठों से लाइव रिपोर्ट। साथ ही अश्विन में दुर्गा पूजा शुरू होने की कहानी...

 

अकाल बोधोन, यानी अश्विन मास में दुर्गा पूजा शुरू होने की कथा...

पहले मां दुर्गा की पूजा चैत्र में ही हुआ करती थी। भगवान राम ने रावण को हराने के लिए पहली बार अश्विन मेंं मां की पूजा की। इसलिए बंगाल में इसे अकाल बोधोन कहते हैं। यानी असमय पूजा। कथा ये है कि रावण को हराने के लिए भगवान राम को शक्ति चाहिए थी। वे दुर्गा की उपासना पर बैठते हैं। मां दुर्गा की शर्त है कि राम 108 नीलकमलों से पूजा करें। हनुमान 108 नीलकमल ले आते हैं, पर मां दुर्गा परीक्षा लेने के लिए एक फूल छिपा लेती हैं। ऐसे में चिंतित राम, जिनकी आंखें नीलकमल सी हैं, अपनी एक आंख निकालकर मां पर चढ़ाने लगते हैं। तभी दुर्गा विजयी भव का आशीर्वाद देती हैं। नवरात्र में अष्टमी-नवमी की रात राम-रावण के बीच भीषण युद्ध हुआ था। इसीलिए आज भी आधी रात को विशेष पूजा की जाती है।

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