पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App

जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है तमिलनाडु का 219 साल पुराना जंबुकेश्वर मंदिर

6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • 1800 शताब्दी में द्रविड़ वास्तुकला में बना था जंबुकेश्वर शिव मंदिर

जीवन मंत्र डेस्क. तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में भगवान शिव का मंदिर है। जो जंबुकेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है। ये दक्षिण भारत के प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है। माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण शक्तिशाली हिंदू चोल राजवंश के राजा कोकेंगानन ने करवाया था। इस मंदिर को तमिलनाडु के प्रसिद्ध 5 शिव मंदिरों में गिना जाता है। ये पांच मंदिर पंच महातत्वों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इनमें जंबुकेश्वर जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इस मंदिर में भूमिगत जल धारा है। जिससे यहां कभी पानी की कमी नहीं होती है।

यहां पार्वती जी ने की थी तपस्या
इस मंदिर से कई पौरािणक किवदंतियां जुड़ी हुई हैं। माना जाता है कि एक बार भगवान शिव ने देवी पार्वती को कैलाश पर्वत से पृथ्वी पर जाकर तपस्या करने का निर्देश दिया। भगवान शिव के कहने पर देवी पार्वती अक्विलादेश्वरी के रूप में पृथ्वी पर पहुंचीं और जंबू वन में तपस्या करना शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होने कावेरी नदी के पास पेड़ के नीचे शिवलिंग बनाया और शिव पूजा में लीन हो गईं। बाद में ये शिवलिंग अंपुलिंगम के रूप में जाना गया। देवी पावर्ती की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने अक्विलादेश्वरी को दर्शन दिए और उन्हें शिव ज्ञान की प्राप्ति करवाई।
 

मालयान और पुष्पदंत को मिली थी श्राप से मुक्ति

  • इस मंदिर से जुड़ी एक और पौरािणक कथा है कि मालयान और पुष्पदंत नाम के 2 शिवभक्त थे। वे हमेशा आपस में झगड़ा करते रहते थे। एक बार दोनों आपस में लड़ रहे थे इस दौरान मालयान ने पुष्पदंत को हाथी बनने का श्राप दे दिया। और बाद में मालयान को भी मकड़ी बनने का श्राप मिला।इसके बाद हाथी और मकड़ी दोनों जंबुकवन आए और शिवजी की पूजा में लग गए।
  • मकड़ी ने अपनी श्रद्धा दिखाने के लिए शिवलिंग पर जाला बुना ताकि सूर्य की तेज रोशनी और पेड़ के सुखे पत्ते शिवलिंग पर न गिरे। जब हाथी ने शिवलिंग पर जाला देखा तो उसे गंदगी समझकर हटा दिया। इस पर मकड़ी ने गुस्से में आकर हाथी की सूंड में घूसकर उसे मार डाला और खुद भी मर गई। इसके बाद दोनों की गहरी भक्ति देखकर भगवान शिव जंबुकेश्वर मंदिर आए और दोनों को श्राप से मुक्त कर दिया।

दो गोपुरम बने हैं इस मंदिर में 

  • जंबुकेश्वर मंदिर की वास्तुकला श्रीरंगम रंगनाथ स्वामी मंदिर से कहीं बढ़कर है। हालांकि दोनों का निर्माण एक ही समय में किया गया है। मंदिर के अंदर पांच प्रांगण मौजूद है। मंदिर के पांचवे परिसर में सुरक्षा के लिए दीवार का निर्माण किया गया है। जिसे दिबुड़ी प्रकाश के नाम से जाना जाता है। जो लगभग एक मील तक फैला हुआ है। ये 2 फीट चौड़ा और 25 फीट उंचा है।
  • चौथे परिसर में एक बड़ा हॉल है और 769 स्तंभ मौजूद है। इसके अलावा यहां जलकुंड भी है। तीसरे परिसर में 2 बड़े गोपुरम मौजूद है। जो 73 और 100 फीट लंबे है। मंदिर का गर्भगृह चौकोर आकार का है।
0

आज का राशिफल

मेष
मेष|Aries

पॉजिटिव- आर्थिक दृष्टि से आज का दिन आपके लिए उपलब्धियां ला रहा है। उन्हें सफल बनाने के लिए आपको दृढ़ निश्चयी होकर काम करना है। आज कुछ समय स्वयं के लिए भी व्यतीत करें। आत्म अवलोकन करने से आपको बहुत अधिक...

और पढ़ें