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पूजा विधि / चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन, विजय प्राप्ति के लिए की जाती है देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा

Chaitra Navratri 2020 Devi Maa Brahmacharini Puja Vidhi Day 2 |  Brahmacharini Puja Mantra,  Maa Brahmacharini Vrat Katha, Story Importance and Significance
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Chaitra Navratri 2020 Devi Maa Brahmacharini Puja Vidhi Day 2 |  Brahmacharini Puja Mantra,  Maa Brahmacharini Vrat Katha, Story Importance and Significance

  • शिवजी को प्राप्त करने के लिए देवी ने बेल-पत्र खाकर और निर्जल रहकर तपस्या की इसलिए कहा जाता है ब्रह्मचारिणी

दैनिक भास्कर

Mar 25, 2020, 04:48 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. ब्रह्मचारिणी देवि की पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप ज्योर्तिमय है। ये मां दुर्गा की नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। तपश्चारिणी, अपर्णा और उमा इनके अन्य नाम हैं। इनकी पूजा करने से सभी काम पूरे होते हैं, रुकावटें दूर हो जाती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। इसके अलावा हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं। देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार, संयम की वृद्धि होती है।

माता का स्वरूप
देवी ने शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों सालों तक बेल-पत्र और फिर निर्जल और निराहार रहकर तपस्या की। जिसके कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी कहा गया। इनके दाहिने हाथ मे जप की माला होती है और बांए हाथ मे कमंडल रहता है। देवी ब्रह्मचारिणी साक्षात ब्रह्म का स्वरूप है अर्थात तपस्या का मूर्तिमान रूप है। ये देवी भगवती दुर्गा, शिवस्वरूपा, गणेशजननी, नारायनी, विष्णुमाया और पूर्ण ब्रह्मस्वरूपिणी के नाम से प्रसिद्ध है।

ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा विधि

  1. देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करते समय सबसे पहले हाथों में एक फूल लेकर उनका ध्यान करें और प्रार्थना करें।
  2. इसके बाद देवी को पंचामृत स्नान कराएं, फिर अलग-अलग तरह के फूल,अक्षत, कुमकुम, सिन्दुर, अर्पित करें।  
  3. देवी को सफेद और सुगंधित फूल चढ़ाएं। इसके अलावा कमल का फूल भी देवी मां को चढ़ाएं और इन मंत्रों से प्रार्थना करें।

1. या देवी सर्वभू‍तेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

2. दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

इसके बाद देवी मां को प्रसाद चढ़ाएं और आचमन करवाएं। प्रसाद के बाद पान सुपारी भेंट करें और प्रदक्षिणा करें यानी 3 बार अपनी ही जगह खड़े होकर घूमें। प्रदक्षिणा के बाद घी व कपूर मिलाकर देवी की आरती करें। इन सबके बाद क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद बांट दें।

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