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ब्रह्मा के विशाल यज्ञ से बना ब्रह्म सरोवर, यहां मनाया जा रहा है गीता जयंती महोत्सव

एक वर्ष पहले
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जीवन मंत्र डेस्क. ब्रह्मपुराण के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का बड़ा महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन अर्जुन को भगवद् गीता का उपदेश दिया था। इस दिन को गीता जयंती के रूप में मनाया जाता है, इस बार ये 8 दिसंबर को है। हरियाणा के कुरुक्षेत्र जिले के बारे में माना जाता है की यहीं महाभारत की लड़ाई हुई थी और भगवान कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश यहीं ज्योतिसर नामक स्थान पर दिया था। कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मा सरोवर पर हर साल अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस बार गीता जयंती महोत्सव 22 नवंबर से प्रारंभ हो चुका है जो कि 10 दिसंबर तक चलेगा।

  • ब्रह्मा द्वारा विशाल यज्ञ से बना ब्रह्म सरोवर

कुरुक्षेत्र में स्थित ब्रह्मा सरोवर पर हर वर्ष अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है। ब्रह्मा सरोवर के बारे में पौराणिक कथाओं में मान्यता है कि, कुरूक्षेत्र को भगवान ब्रह्मा द्वारा विशाल यज्ञ से निर्मित किया गया था। यहां भगवान शिव का एक मंदिर भी है जहां एक पुल के माध्यम से पहुंचा जा सकता है। गीता जयंती पर यहां दीपदान का आयोजन भी किया जाता है जिसमें पानी में जलते हुए दीपों को बहाया जाता है।

  • अश्वमेघ यज्ञ के बराबर पुण्य की प्राप्ति

कहा जाता है कि इस कुंड में डुबकी लगाने से उतना ही पुण्य प्राप्त होता है जितना पुण्य अश्वमेघ यज्ञ को करने के बाद मिलता है। यह कुंड 1800 फीट लम्बा और 1400 फीट चौड़ा है। इस कुंड में स्नान करने के लिए सूर्य ग्रहण और गीता जंयती के दौरान काफी भीड़ होती है। शास्त्रों के अनुसार सूर्यग्रहण के समय सभी देवता यहां कुरुक्षेत्र में मौजूद होते हैं। ऐसी मान्यता है कि सूर्यग्रहण के अवसर पर ब्रह्मा सरोवर और सन्निहित सरोवर में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।

  • श्रीकृष्ण ने भी यहां किया था स्नान

इस सरोवर को लेकर एक और मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण ने भी इस सरोवर में स्नान किया था। अतीत में ब्रह्म सरोवर का नाम ब्रह्म वेदी और रामहृद भी रहा है। बाद में राजा कुरु के नाम पर कुरुक्षेत्र हुआ। कुरुक्षेत्र का अतीत अत्यंत दिव्य और गौरवमय रहा है। इसी धरती पर ऋषियों ने वेदों की रचना की और ब्रह्मा ने विशाल यज्ञ किया। यहीं पर महर्षि दधीचि ने इंद्र को अस्थिदान किया था। हर साल होने वाले अंंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होने के लिए ना सिर्फ देश के विभिन्न हिस्सों से बल्कि विदेश से भी लोग आते हैं।

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