शुक्रवार विशेष / श्रीपुरम् वैल्लूर से लक्ष्मी नारायण दिल्ली तक, देश में महालक्ष्मी के 5 सबसे खास मंदिर

5 most special temples of Mahalakshmi in the country, from Sripuram Vellore to Lakshmi Narayan Delhi
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5 most special temples of Mahalakshmi in the country, from Sripuram Vellore to Lakshmi Narayan Delhi

  • सैंकड़ों किलो सोने से बना है वैल्लूर का महालक्ष्मी मंदिर, 120 किलो सोने की है मूल प्रतिमा 
  • कोल्हापुर का महालक्ष्मी मंदिर है लोगों की आस्था का केंद्र जहां सूर्य भी माता के चरणों में नवाते हैं शीश 

Dainik Bhaskar

Jan 09, 2020, 05:26 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. शुक्रवार को देवी की उपासना का दिन माना जाता है। देवी दुर्गा हो, सरस्वती या महालक्ष्मी, इन तीनों देवियों की आराधना का दिन शुक्रवार को माना गया है। खासतौर पर महालक्ष्मी का आराधना के लिए शुक्रवार का विशेष महत्व है। भारत में देवी लक्ष्मी के ऐसे कई मंदिर है, जिनका अपना ऐतिहासिक महत्व है। हजारों साल पुराने मंदिरों से लेकर नए मंदिरों तक में देवी लक्ष्मी का वैभव देखा जा सकता है। श्रीपुरम् वैल्लूर में बना महालक्ष्मी मंदिर सबसे महंगे मंदिरों में से एक माना जाता है। सैंकड़ों किलो सोने से बने इस मंदिर में देवी लक्ष्मी की 120 किलो सोने की प्रतिमा स्थापित है। ऐसे ही 5 मंदिरों के बारे में जानिए, जहां लक्ष्मी भक्तों की सबसे अधिक आस्था है।  

महालक्ष्मी मंदिर (वैल्लूर)
तमिलनाडु राज्य के सबसे खास शहरों में से एक है वैल्लोर या वैल्लूर। चेन्नई से लगभग 145 किमी. की दूरी पर बसा यह शहर ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। वैल्लूरू से 7 किलोमीटर दूर थिरूमलाई कोडी में सोने से बना श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर स्थित है। इस मंदिर को बनने में 7 वर्षों का समय लगा, जो लगभग 100 एकड़ भूमि पर बना हुआ है। महालक्ष्मी मंदिर के निर्माण में तकरीबन 1500 किलो सोने का इस्तेमाल हुआ है। मंदिर में देवी महालक्ष्मी की मूल प्रतिमा भी सोने की है, जिसका वजन लगभग 120 किलो है। 24 अगस्त 2007 को यह मंदिर दर्शन के लिए खोला गया था। 

महालक्ष्मी मंदिर (मुंबई)
मुंबई के सर्वाधिक प्राचीन धर्मस्थलों में से एक है यहाँ का महालक्ष्मी मंदिर। समुद्र के किनारे बी. देसाई रोड पर स्थित यह मंदिर बहुत सुंदर, आकर्षक और लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। महालक्ष्मी मंदिर के मुख्य द्वार पर सुंदर नक्काशी की गई है। मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं की आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित हैं। कहा जाता है कि रामजी नाम के एक ठेकेदार के सपने में आकर मां लक्ष्मी ने उसे समुद्र में से देवियों की तीन मूर्ति निकालकर, उन्हें स्थापित करने को कहा था। मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर में वही तीन मूर्तियां महालक्ष्मी, महाकाली एवं महासरस्वती के रूप में स्थापित है।

लक्ष्मी नारायण मन्दिर (दिल्ली)
लक्ष्मीनारायण मन्दिर दिल्ली शहर का सबसे प्रसिद्ध मन्दिर है। इसे दिल्ली का बिड़ला मन्दिर भी कहते हैं। कनॉट प्लेस के पश्चिम में बना यह मन्दिर 1938 में उद्योगपति राजा बलदेव बिड़ला द्वारा बनवाया गया था और महात्मा गांधी ने इसका उद्घाटन किया था। यह मंदिर मूल रूप में 1622 में वीर सिंह देव ने बनवाया था, उसके बाद पृथ्वी सिंह ने 1793 में इसका जीर्णोद्धार कराया। वर्ष 1938 में भारत के बड़े औद्योगिक परिवार, बिड़ला समूह ने इसका विस्तार और पुनरोद्धार कराया।

महालक्ष्मी मंदिर (कोल्हापुर)
मुंबई से लगभग 400 किमी. दूर कोल्हापुर महाराष्ट्र का एक जिला है, जिसमें धन की देवी लक्ष्मी का एक सुंदर मंदिर है| यहां पर देवी लक्ष्मी को अम्बा जी के नाम पुकारा जाता है। कहा जाता है कि इस महालक्ष्मी मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में चालुक्य शासक कर्णदेव ने 7वीं शताब्दी में करवाया था। इसके बाद शिलहार यादव ने इसे 9वीं शताब्दी में और आगे बढ़ाया। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में देवी महालक्ष्मी् की लगभग 40 किलो की प्रतिमा स्थापित है, जिसकी लम्बाई लगभग चार फीट की है। ये लक्ष्मी प्रतिमा लगभग 7000 साल पुरानी है। साल में दो बार कार्तिक मास और माघ मास में इस मंदिर में मां लक्ष्मी की मूर्ति पर सूर्य की किरणें पड़ती हैं, जिसे किरण उत्सव या किरणों का त्योहार कहा जाता है।

अष्टलक्ष्मी मंदिर (चैन्नई)
चैन्नई के इलियट समुद्री तक के पास देवी लक्ष्मी का अष्टलक्ष्मी नाम का एक मंदिर है। यह मंदिर देवी लक्ष्मी के आठ रूप - वंश,  सफलता,  समृद्धि,  धन,  साहस,  वीरता,  भोजन  और ज्ञान को समर्पित है। यह मंदिर लगभग 65 फीट लम्बा और 45 फीट चौड़ा है। मंदिर में देवी लक्ष्मी के 8 स्वरूप 4 मंजिल में बने 8 अलग-अलग कमरों में स्थापित हैं। भगवान विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी मंदिर की दूसरी मंजिल में विराजित हैं।
 

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