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नव संवत्सर / हिंदू नववर्ष 2077 में अधिमास के कारण रहेंगे दो आश्विन माह

Hindu Nav Varsh New Year Adhik (Purushottam) Maas 2020; Vikram Samvat 2077 Start Date, Festival (Diwali, Navratri, Dussehra, Shraddha Paksha)
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Hindu Nav Varsh New Year Adhik (Purushottam) Maas 2020; Vikram Samvat 2077 Start Date, Festival (Diwali, Navratri, Dussehra, Shraddha Paksha)

  • नवरात्र, सर्वपितृ अमावस्या के अगले दिन नहीं, बल्कि पूरे एक माह बाद होंगे शुरू

दैनिक भास्कर

Mar 20, 2020, 04:56 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. 25 तारीख से शुरू होने वाला नया साल अधिमास वाला रहेगा। काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार इस नए संवत्सर में 2 अश्विन माह होंगे। आश्विन माह 3 सितंबर से 31 अक्टूबर तक रहेगा। यानी इसकी अवधि करीब दो माह रहेगी। इन दो माह में बीच की अवधि वाला एक माह का समय अधिमास रहेगा। 

  • इस बार  शारदीय नवरात्र पितृमोक्ष अमावस्या के अगले दिन नहीं, बल्कि पूरे एक माह बाद शुरू होंगे। इसके बाद जितने भी त्योहार आएंगे वे 10 से 20 दिन या इससे कुछ अधिक देरी से आएंगे। दीपावली नए साल में 14 नवंबर को होगी, जो 2019 में 27 अक्टूबर को थी। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है। इससे पहले यह 2018 में था, तब दो भाद्रपद माह हुए थे।

 
सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर को

काशी के ज्योतिषाचार्य पं. गणेश मिश्रा के अनुसार नए साल में पितृपक्ष की शुरुआत 2 सितंबर को होगी। इस बार श्राद्धपक्ष में कोई भी तिथि क्षय नहीं होने से सर्वपितृ अमावस्या 17 सितंबर को मनाई जाएगी। अधिमास अश्विन शुक्लपक्ष की शुरुआत 18 अक्टूबर को होगी। इस कारण 17 सितंबर को श्राद्ध पक्ष पूरे होने के बावजूद अगले दिन नवरात्र शुरू नहीं होंगे और अधिकमास खत्म होने के साथ 17 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो जाएगी।   

आश्विन माह 3 सितंबर से

पं. दीक्षित ने बताया इस बार अश्विन माह 58 दिनों का रहेगा। जिसमें 3 से 17 सितंबर तक शुद्ध अश्विन माह के शुरुआती 15 दिन रहेंगे। जो कि कृष्णपक्ष रहेगा। इसके बाद 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक अधिमास के कृष्ण और शुक्लपक्ष रहेंगे। फिर 17 अक्टूबर से शुद्ध अश्विन माह के बचे हुए 15 दिन शुरू हो जाएंगे जो कि 31 अक्टूबर तक रहेंगे। इस दौरान नवरात्रि और दशहरा पर्व मनाया जाएगा।

इस बार दीपावली 14 नवंबर को
14 नवंबर को दीपावली के बाद नए साल में यम द्वितीया (भाई दूज) 16 नवंबर को होगी। देवउठनी 2020 में 25 नवंबर को होगी जो पिछले साल 8 नवंबर को थी। वहीं कार्तिक पूर्णिमा, वैकुंठ चतुदर्शी, काल भैरव अष्टमी, चंपा षष्ठी, विवाह पंचमी आदि व्रत व त्योहार भी देरी से आएंगे।

इसलिए होता है अधिमास
सौर मास 365 दिन का, जबकि चंद्र मास 354 दिन का होता है। इसमें हर साल 11 दिन का अंतर आता है, जो 3 साल में बढ़कर 1 माह से अधिक हो जाता है। यह 32 माह 16 दिन के अंतराल से हर तीसरे साल में होता है। 2018 में भाद्रपद में था तो अब आश्विन में हो रहा है। इस अंतर को सही करने के लिए अधिमास की व्यवस्था की गई है।

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