विवाह पंचमी / रामचरित मानस का पुष्प वाटिका प्रसंग, श्रीराम ने कैसे स्वीकारा सीता का प्रेम

Ramacharit Manas; How did Ram accept Sita's love for the flower garden affair
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Ramacharit Manas; How did Ram accept Sita's love for the flower garden affair

रामचरित मानस के पुष्प वाटिका प्रसंग में दिखता है मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का सहज प्रेम

Dainik Bhaskar

Nov 30, 2019, 03:43 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. मार्गशीर्ष महीने के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि पर श्रवण नक्षत्र में सीता-राम विवाह की परंपरा है। माना जाता है त्रेतायुग में इसी संयोग पर श्रीराम और सीता का विवाह हुआ था। इस दिन को विवाह पंचमी कहा जाता है। इस बार ये पर्व रविवार 1 दिसंबर को मनाया जाएगा। सीता-राम विवाह से जुड़े प्रसंग वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास रचित रामचरित मानस में बताए गए हैं। जिनसे कई बातें सीखने को मिलती है। तुलसी रामायण यानी रामचरित मानस में श्रीराम और सीता का पुष्प वाटिका प्रसंग बताया गया है। जो इस प्रकार है - 

  • पुष्प वाटिका प्रसंग
  1. विश्वामित्र अपने शिष्य श्रीराम और लक्ष्मण के साथ जब मिथिला पहुंचते हैं तो जनकवाटिका में रुकते हैं। वहां पर सुबह-सुबह श्रीराम और लक्ष्मण गुरु के पूजन के लिए फूल लेने के लिए पुष्प वाटिका में जाते हैं।
  2. वहां सीता जी भी अपनी सखियों के साथ मां सुनयना के आदेश से पार्वती मंदिर में पूजा के लिए आती हैं। वहां सीता श्रृंगार सहित आती हैं।
  3. उनकी ध्वनि राम के कानों में गूंजती है। इस पर श्रीराम को पहले से ही आभास हो जाता है और वो लक्ष्मण से कहते हैं कि कामदेव नगाड़े बजाते हुए आ रहे हैं। मुझे बचाओ।
  4. इतना कहते ही श्रीराम और सीता के नेत्र मिलते हैं। दोनों एक-दूसरे को  अपलक देखते हैं और लक्ष्मण उन्हें दूर ले जाते हैं।
  5. इसके बाद सीता माता पार्वती के मंदिर में आकर अपनी प्रार्थना देवी काे अर्पित करती हैं और श्रीराम को पति के रूप में प्राप्त करने की विनती करती हैं।
  6. वहीं सरल स्वभाव के श्रीराम पुष्प लेकर गुरु के पास गए और उन्होने अपने गुरू को सारी बात बता दी। इस पर विश्वामित्र कहते हैं कि तुमने मुझे फूल दिए, अब तुम्हें फल प्राप्त होगा।

  • सीख

श्रीराम और सीता का विवाह से पूर्व का यह प्रेम अत्यंत पवित्र है। ये भाव और मन के तल पर प्रेम और स्नेह की पराकाष्ठा है। सीता और राम दोनों ही मानसिक रूप से इसे स्वीकार करते हैं। यह सात्विक दृश्य कितना प्रेरक है। वासना प्रेम नहीं है। स्वतंत्रता के नाम पर मर्यादा तोड़ना उचित नहीं है। राम ने काम को स्वीकार कर प्रेम और वासना का अंतर बताया है। यह प्रसंग उन्हें मानव के स्तर से बहुत ऊंचा उठाता है।

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