व्रत / 24 नवंबर को बनेगा रवि प्रदोष का संयोग, लंबी उम्र और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है ये व्रत

Ravi Pradosh will be celebrated on November 24, this fast is observed for long life and good health
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Ravi Pradosh will be celebrated on November 24, this fast is observed for long life and good health

  • साल का आखिरी रवि प्रदोष 24 नवंबर को, इस व्रत से शिवजी और पार्वती दोनों प्रसन्न होते हैं।

Dainik Bhaskar

Nov 22, 2019, 03:26 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. शिव उपासना के लिए हर महीने शुक्ल एवं कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि को श्रेष्ठ बताया गया है। इसे प्रदोष भी कहा जाता है। 24 नवंबर को साल का आखिरी रवि प्रदोष व्रत किया जाएगा। इसके बाद अप्रैल 2020 में ये योग बनेगा। कृष्णपक्ष में पड़ने वाले प्रदोष के अगले दिन यानी चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्री मनाई जाती है। इसलिए इस बार 24 और 25 नवंबर को शिव पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि प्रदोष पर भगवान शिव कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं। इसलिए प्रदोष पर व्रत रखने और भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है।

  • प्रदोष का महत्व

हिन्दू धर्म के अनुसार, प्रदोष व्रत कलियुग में अति मंगलकारी और शिव कृपा प्रदान करने वाला होता है। माह की त्रयोदशी तिथि में सायं काल को प्रदोष काल कहा जाता है। यह व्रत रखने से हर प्रकार का दोष मिट जाता है। इसलिए इसे प्रदोष कहा जाता है। इस व्रत के रखने से दो गायों के दान करने जितना पुण्य मिलता है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से न केवल भगवान शिव बल्कि माता पार्वती की भी कृपा बनी रहती है।

  • अलग-अलग तरह के प्रदोष व्रत और उनसे मिलने वाले लाभ

प्रदोष व्रत का हर दिन के अनुसार अलग-अलग महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन यह व्रत आता है उसके अनुसार इसका नाम और महत्व बदल जाता है।

  1. जो उपासक रविवार को प्रदोष व्रत रखते हैं, उनकी आयु में वृद्धि होती है अच्छा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होता है।
  2. सोमवार के दिन के प्रदोष व्रत को सोम प्रदोषम या चन्द्र प्रदोषम भी कहा जाता है और इसे मनोकामनायों की पूर्ति करने के लिए किया जाता है।
  3. जो प्रदोष व्रत मंगलवार को रखे जाते हैं उनको भौम प्रदोषम कहा जाता है। इस दिन व्रत रखने से हर तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है और स्वास्थ सम्बन्धी समस्याएं नहीं होती। 
  4. बुधवार के दिन इस व्रत को करने से हर तरह की कामना सिद्ध होती है।
  5. बृहस्पतिवार के दिन प्रदोष व्रत करने से शत्रुओं का नाश होता है।
  6. वो लोग जो शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत रखते हैं, उनके जीवन में सौभाग्य की वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन में सुख-शांति आती है।
  7. शनिवार के दिन आने वाले प्रदोष व्रत को शनि प्रदोषम कहा जाता है और लोग इस दिन संतान प्राप्ति की चाह में यह व्रत करते हैं। अपनी इच्छाओं को ध्यान में रख कर प्रदोष व्रत करने से फल की प्राप्ति निश्चित ही होती है।
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