पर्व / संत रविदास जयंती रविवार को, 570 साल पहले वाराणसी के पास के गांव में हुआ था उनका जन्म

Sant Ravidas Jayanti was born on Sunday, 570 years ago in the nearby village of Varanasi.
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Sant Ravidas Jayanti was born on Sunday, 570 years ago in the nearby village of Varanasi.

  • साधुओं की सेवा करते थे संत रविदास, राम और कृष्ण भक्ति करते हुए लोगों का भला किया था उन्होंने

Dainik Bhaskar

Feb 07, 2020, 03:46 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. संत रविदास जयंती हिन्दू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने की पूर्णिमा पर मनाई जाती है। इस बार ये दिन मंगलवार, 19 फरवरी को है। इस वर्ष उनका 642 वां जन्मदिवस मनाया जा रहा है। संत रविदास जी का जन्म वाराणसी के पास के गांव में हुआ था। माना जाता है इनका जन्म लगभग सन 1450 में हुआ था। उनकी माता का नाम श्रीमति कलसा देवी और पिता का नाम श्रीसंतोख दास जी था। संत रविदास दूसरों साधु-संतों की बहुत सेवा करते थे। वे लोगों के लिए जूते-चप्पल बनाने का काम करते थे। उन्होंने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी। 

इस दिन किया जाता है पवित्र नदी में स्नान

संत रविदास जयंती पर उनके अनुयायी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। उसके बाद अपने गुरु के जीवन से जुड़ी महान घटनाओं को याद कर उनसे प्रेरणा लेते हैं। संत रविदास के जीवन के कई ऐसे प्रेरक प्रसंग है जिनसे हम सुखी जीवन के सूत्र सीख सकते हैं। ये दिन उनके अनुयाइयों के लिए वार्षिक उत्सव की तरह होता है। उनके जन्म स्थान पर लाखों भक्त पहुंचते हैं और वहां बड़ा कार्यक्रम होता है। जहां संत रविदास जी के दोहे गाए जाते हैं और भजन-किर्तन भी होता है।

रविदास जी कैसे बने संत

एक कथा के अनुसार रविदास जी अपने साथी के साथ खेल रहे थे। एक दिन खेलने के बाद अगले दिन वो साथी नहीं आता है तो रविदास जी उसे ढूंढ़ने चले जाते हैं, लेकिन उन्हे पता चलता है कि उसकी मृत्यु हो गई। ये देखकर रविदास जी बहुत दुखी होते हैं और अपने मित्र को बोलते हैं कि उठो ये समय सोने का नहीं है, मेरे साथ खेलो। इतना सुनकर उनका मृत साथी खड़ा हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि संत रविदास जी को बचपन से ही आलौकिक शक्तियां प्राप्त थी। लेकिन जैसे-जैसे समय निकलता गया उन्होंने अपनी शक्ति भगवान राम और कृष्ण की भक्ति में लगाई। इस तरह धीरे-धीरे लोगों का भला करते हुए वो संत बन गए।

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