तीज-त्योहार / विनायक चतुर्थी 30 नवंबर को, इसका व्रत करने से गणेशजी पूरी करते हैं मनोकामना

Vinayak Chaturthi on November 30, Ganeshji fulfills his wishes by fasting
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Vinayak Chaturthi on November 30, Ganeshji fulfills his wishes by fasting

शुक्लपक्ष की चतुर्थी को विनायकी और कृष्णपक्ष की इस तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है

Dainik Bhaskar

Nov 27, 2019, 04:02 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान श्रीगणेश को प्रसन्न करने के लिए विनायकी चतुर्थी का व्रत किया जाता है। अगहन यानी मार्गशीर्ष माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि पर गणेश पूजा का महत्व और अधिक होता है। इस बार ये व्रत 30 नवंबर, शनिवार को है। इस दिन भगवान श्रीगणेश का विधि -विधान से पूजन और इस व्रत का आस्था और श्रद्धा से पालन करने पर भगवान श्रीगणेश की कृपा से मनोरथ पूरे होते हैं। जीवन में निरंतर सफलता भी प्राप्त होती है।

  • व्रत विधि
  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि काम जल्दी ही निपटा लें। दोपहर के समय अपनी इच्छा के अनुसार सोने, चांदी, तांबे, पीतल या मिट्टी से बनी भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। 
  2. संकल्प मंत्र के बाद श्रीगणेश की षोड़शोपचार पूजन-आरती करें और गणेशजी की मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाएं। 
  3.  ऊँ गं गणपतयै नम: मंत्र बोलते हुए 21 दूर्वा दल चढ़ाएं एवं बूंदी के 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। इनमें से 5 लड्डू मूर्ति के पास रख दें तथा 5 ब्राह्मण को दान कर दें। शेष लड्डू प्रसाद के रूप में बांट दें। 
  4. पूजा में श्रीगणेश स्त्रोत, अथर्वशीर्ष, संकटनाशक स्त्रोत आदि का पाठ करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा देने के बाद शाम को स्वयं भोजन ग्रहण करें। संभव हो तो व्रत या उपवास भी करें। 

  • विनायकी चतुर्थी का महत्व

विनायक चतुर्थी को वरद विनायक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। भगवान से अपनी किसी भी मनोकामना की पूर्ति के आशीर्वाद को वरद कहते हैं। जो श्रद्धालु विनायक चतुर्थी का उपवास करते हैं भगवान गणेश उसे ज्ञान और धैर्य का आशीर्वाद देते हैं। ज्ञान और धैर्य दो ऐसे नैतिक गुण है जिसका महत्व सदियों से मनुष्य को ज्ञात है। जिस मनुष्य के पास यह गुण हैं वह जीवन में काफी उन्नति करता है और मनवान्छित फल प्राप्त करता है।

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